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अपना वेबसाइट का व्यापार कैसे शुरू करें - How to start a website business, hindi new articles

18 मार्च 2015   |  मिथिलेश कुमार सिंह
अपना वेबसाइट का व्यापार कैसे शुरू करें - How to start a website business, hindi new articles

कंप्यूटर इंजीनियरिंग, एमसीए, बीसीए के ग्रेजुएट जब कॉलेज से निकलते हैं तो बिचारों को कई कठिनाइयों से जूझना पड़ता है. आईआईटी, एनआईटी और कुछ बड़े कॉर्पोरेट इंजीनियरिंग संस्थानों को यदि छोड़ दिया जाय तो दुसरे इंजीनियरिंग कॉलेज से बड़ी संख्या में निकले ग्रेजुएट्स यहाँ, वहां इंटरव्यू देते हुए निराशा की ओर बढ़ने लगते हैं. फिर उनमें से कुछ जबरदस्ती एमबीए या एमटेक में एड्मिसन की तरफ दौड़ लगा देते हैं, या छोटी-मोटी कंपनियों में नौकरी शुरू कर देते हैं. कई अपनी फील्ड्स चेंज कर देते हैं तो कई बिचारे अपने जूनियर्स को तैयारी कराने लगते हैं और कई उसी कॉलेज में पढ़ाने लगते हैं, जहाँ से उन्होंने इंजीनियरिंग की थी. यह तो रही बिचारे इंजीनियर्स की दुःख भरी कहानी. लेकिन, इन सभी में कहीं न कहीं अपना उद्यम शुरू करने की ललक भी रहती है. और कहीं न कहीं वह बहुतायत रूप से वेबसाइट के कारोबार को लेकर रुचि रखते हैं. तो लीजिये, कंप्यूटर इंजीनियर्स के लिए वेबसाइट की व्यावसायिक संभावनाओं पर कुछ बिन्दुवार रिपोर्ट्स:


वेबसाइट बनाने का व्यापार: यह इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स द्वारा सबसे ज्यादा शुरू किया जाने वाला कारोबार है, किन्तु शुरूआती दौर में इसमें तमाम उतार-चढाव आते हैं, जैसे:



गलत प्रोग्रामिंग लैंगुएज का चुनाव- वैसे तो मार्किट में तमाम भाषाएँ हैं, जिसमें C#.NET, Java और PHP प्रमुख हैं. इसमें सबसे सटीक और शुरूआती लैंगुएज के तौर पर आप PHP का चुनाव करेंगे तो आपकी सफलता की संभावनाएं 200 फीसदी बढ़ जाएँगी. कारण तमाम हैं, संक्षिप्त में इसका सरल होना, इसके एम्प्लाइज का आसानी से मिल जाना, तमाम CMS का इसी भाषा में होना और वेब-होस्टिंग से इसकी कम्पैटिबिलिटी इसको शुरूआती वेबसाइट बिजनेस के लिए परफेक्ट बनाती है. वहीं .NET और JAVA में तमाम कोम्प्लिकेशन्स और व्यवहारिक कठिनाइयाँ हैं, विशेषकर छोटे और देसी प्रोजेक्ट्स में इसकी कॉस्टिंग PHP की तुलना में 10 गुणा बढ़ जाती है और यूजर-एक्सपीरियंस कठिनाई में डालने वाला होता है. इसके अतिरिक्त PHP में आप को पेश आने वाली किसी भी एक दिक्कत के लिए कम से कम सौ तरह के सल्यूशन अलग-अलग फोरम्स पर मिल जायेंगे. सबसे बड़ी बात आपको इंडियन मार्किट में PHP के प्रोजेक्ट ही मिलेंगे और जहाँ हज़ार, दो हजार में वेबसाइट बन रही हैं, वहां आप .NET और JAVA में इतनी कम कॉस्ट पर सोच भी नहीं सकते हैं. .NET और JAVA बड़े और महंगे प्रोजेक्ट्स के लिए सही साबित होती हैं. Choose accurate programming language.
स्टैन्डर्ड CMS का चुनाव- आपने PHP में काम तो शुरू कर दिया, किन्तु इसका मतलब यह नहीं कि आप हर काम कस्टम ही करने लगें, मतलब हर प्रोजेक्ट के लिए शुरू से डिजाइनिंग और कोडिंग. फिर फेल कर जायेंगे आप, क्योंकि अपना स्टैन्डर्ड विकसित करना, कस्टम प्रोजेक्ट्स में सपोर्ट देना और कोई फंक्शन घटाना या बढ़ाना बेहद सरदर्दी और कॉस्ट बढ़ाने वाला साबित होता है. इससे बेहतर होगा यदि आप PHP लैंग्वेज में बने कुछ बेहद सफल CMS में से किसी एक में काम करना शुरू करें, मसलन Wordpress, Joomla, Drupal. यहाँ पर इन प्लेटफॉर्म्स की सभी खासियत बता पाना मुमकिन नहीं है, किन्तु आप यह समझ लें कि वेबसाइट का व्यापार शुरू करने के लिए आप इनको 'भगवान' का दर्जा दे सकते हैं. तमाम रेडीमेड सुविधाएं, टेम्पलेट्स, मुफ्त प्लगिन्स, SEO कम्पेटिबिलिटी, कम खर्च और मार्किट में उपलब्ध सस्ते एम्प्लोयी और हज़ारों फ्रीलांसर्स आपके लिए बेहद सुविधाजनक आधार बनाते हैं. मिथिलेश आपको शुरुआत में Wordpress का चुनाव करने की सलाह देते हैं. Work on CMS Websites like wordpress, joomla, drupal.
सही होस्टिंग और डोमेन सेलर का चुनाव- तमाम डोमेन, होस्टिंग कंपनियां/ रिसेलर आपको बेहद लुभावने ऑफर देंगे, किन्तु आप अलर्ट रहें. भारत में कुछ अच्छी कंपनियां ResellerClub, Net4, Godaddy, BigRock इत्यादि हैं, बाकि आपको इस फिल्ड में काम करते-करते अनुभव राह दिखायेगा. यदि आप PHP में काम कर रहे हैं तो Linux Hosting के लिए जाएँ. Go for good hosting and domain companies.
मार्केटिंग एंड प्रोमोशन: दोस्तों, इसके लिए कोई निश्चित फार्मूला नहीं है, परन्तु तमाम इंडस्ट्री की डायरेक्ट्रीज आपको मिल जाएँगी, जिसकी सहायता से आप अपने कस्टमर को कॉल या मेल के जरिये संपर्क कर सकते हैं. आप फेसबुक, ट्विटर, यूटुब इत्यादि सोशल मीडिया पर सक्रीय रहकर अपने लिए कस्टमर तलाश सकते हैं. आप गूगल पर पेड कैम्पेन (Adwords) चला सकते हैं, किन्तु आप वेबसाइट के लिए B2B प्लेटफॉर्म्स पर भरोसा न करें, जैसे JustDial, IndiaMart, TradeIndia, Alibaba इत्यादि. अनुभव बताता है कि इन सभी से ज्यादा फायदा आपको रिफरेन्स से होगा. इसलिए आप विभिन्न जगहों में अपने संबंधों को मजबूत करें. और हाँ! आप विदेशी प्रोजेक्ट्स की ओर तब तक न भागें, जब तक आप अपनी फिल्ड में जानकार न हो जाएँ और कम से कम 2 साल तक अनुभव न ले चुके हों, क्योंकि Odesk इत्यादि पर नए लड़के प्रोजेक्ट्स लेने के लिए लग जाते हैं, लेकिन अंततः उनको निराशा ही हाथ लगती है, क्योंकि ओवरसीज प्रोजेक्ट्स के लिए बेहद एक्यूरेसी और टाइम-लिमिटेशन होता ही है, साथ ही साथ पेमेंट-टर्म्स और हाई-लेवल की कस्टम्इज़ेशन कर पाने में नए बन्दे कतई सक्षम नहीं हो पाएंगे. हाँ! अनुभव बढ़ने के साथ आप धीरे-धीरे इंटरनेशनल मार्किट को समझने लगेंगे. Choose right platform for marketing and business promotion.
बेहतरीन सर्विस और रिफरेन्स: यह आपके बिजनेस की 'मास्टर की' है और अधिकतर लोग फेल भी यहीं होते हैं. अच्छी सर्विस हम क्यों नहीं दे पाते, इसके कुछ कारण मैं आपको बता सकता हूँ, बाकि आपको अनुभव ही सिखाएगा. आप सही कीमत पर वही काम उठाइये, जिसे आप खर्च के भीतर कर सकें, साथ में आपको 20 फीसदी मुनाफा होना अनिवार्य है. इसके अतिरिक्त यदि बिना समझें आप काम उठाते हैं, और उसे बिना प्लानिंग के करते हैं, तो आपको नुक्सान होना तय है. इसलिए जरूरी है कि छोटे से छोटे प्रोजेक्ट की फिजिबिलिटी देख लें, साथ में कस्टमर की मानसिकता को भी एक हद तक नजर में रखें कि वह सीरियस है, समझदार है, अत्यधिक चतुर है, पैसे देने में आनाकानी करने वाला है, बार-बार प्रोजेक्ट प्लान को चेंज करने वाला तो नहीं है. इसके लिए जरूरी है कि कोई प्रोजेक्ट फाइनल होने से पहले अपनी टर्म्स-कंडीशन उस से लिखित रूप में साझा कर लें और सहमति ले लें. वेबसाइट प्रोजेक्ट में डिजाइनिंग की समस्या ज्यादा आती है, इसलिए डिज़ाइन और फीचर लिखित रूप में फाइनल करने के बाद आगे बढ़ें. इसके बाद समस्या आती है, आपकी कंपनी के एम्प्लोयी की. यदि आपका एम्प्लोयी यथायोग्य नहीं है, आपकी बात नहीं समझ पा रहा है और समय की कीमत नहीं समझता है तो आपके प्रोजेक्ट की कॉस्टिंग पर असर पड़ना तय है. वैसे, छोटी कंपनियों में अधिकांश काम खुद आपको ही करना होगा और एम्प्लाइज के ऊपर निर्भरता बेहद कम करनी होगी, तब तक जब तक आप आर्थिक रूप से सक्षम न हो जाएं. यहाँ ध्यान रहे, सिर्फ महंगा एम्प्लोयी रख लेने से वह अच्छा काम कर के नहीं दे देगा, बल्कि एम्प्लाइज को मैनेज करने के लिए एक बड़ा सिस्टम तैयार करना पड़ता है, जिसमें बेहतरीन टीम, HR Department से लेकर Training Cell और कंपनी में एक बड़ा Future स्कोप दिखना इत्यादि शामिल होते हैं. इन तमाम फैक्टर्स के आधार पर एम्प्लाइज बेहतर परफॉरमेंस दे पाते हैं या देना चाहते हैं. छोटी कंपनियों को इस लेवल तक पहुँचने में लम्बा समय लग जाता है, इसलिए महंगे एम्प्लाइज कतई न रखें, बल्कि कम से कम खर्च में साधारण एम्प्लाइज से काम निकलवाना ही आपकी खूबी को आपकी कंपनी के लिए लाभदायक बना सकेगा. इन सब परिस्थितियों को मैनेज करके आप अपने कस्टमर को, कम खर्च में बेहतरीन सर्विस दे सकते हैं. Best Service and Reference marketing will make you success.
आगे क्या: अब सवाल उठता है कि एक हद तक अपनी कंपनी को सेटअप करने के बाद और आर्थिक रूप से ब्रेकथ्रू के लेवल से आगे आने के बाद हमारा प्लान क्या होना चाहिए? इस स्थिति में ग्रोथ के लिए हम अपने किसी प्रोजेक्ट को शुरू कर सकते हैं, मसलन कोई नौकरी का बड़ा पोर्टल बना सकते हैं, सरकारी सूचनाओं से आम जनता को जोड़ने के लिए किसी वेबसाइट को शुरू कर सकते हैं अथवा पूरी प्लानिंग करके एक नए तरह का सोशल नेटवर्क शुरू कर सकते हैं, किसी फेसबुक या ट्विटर जैसा! पर ध्यान रहे, अपना प्रोजेक्ट सेटअप करने के लिए आप कम से कम इंडस्ट्री में 5 साल तो बिताइये ही, वह भी लगातार. और अपना कोई भी बड़ा प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले उसके सफल होने की सम्भावना, उस पर लगने वाला खर्च और उस से होने वाली आमदनी, उसका मार्किट सेगमेंट इत्यादि तमाम पक्षों पर अध्ययन आवश्यक है. शुरुआत में अपना कोई बड़ा प्रोजेक्ट शुरू करना सामान्यतः नुकसानदायक ही रहता है. हाँ! यदि आपके दिमाग में कोई विचार है, तो उसे 5 साल तक सहेज कर रखें, रिसर्च करें और खुद को और खुद की कंपनी को आर्थिक रूप से, मानव संशाधन में और तकनीकी रूप से सक्षम करें. इसके अतिरिक्त, पांच साल अनुभव लेने के बाद आप किसी बड़े व्यवसायी से किसी प्रोजेक्ट में पार्टनरशिप भी कर सकते हैं, पर शुरू में यह जोखिम लेने की सलाह मिथिलेश आप को बिलकुल नहीं देंगे. Future plan after breakthrough.


सावधानियां:



कंपनी का मतलब ढेर सारे एम्प्लोयी और बड़ा ऑफिस नहीं होता है, बल्कि एक क्वार्टर में आपने कितना मुनाफा कमाया और अगले क्वार्टर में कितना मुनाफा आने की सम्भावना है, इस कांसेप्ट से कंपनी शुरू होती है. [Less Employees, Less Expenses]
कंपनी का मतलब ढेर सारे कस्टमर बनाना कतई नहीं, बल्कि बनाये गए कस्टमर को फायदा पहुँचाना और उसके संबंधों से रिफरेन्स लेना आपकी मार्केटिंग है. [Less Customers for good Service]
तकनीकी युग में कंपनी का आगे बढ़ना सिर्फ और सिर्फ इस बात पर निर्भर करता है कि हर महीने बदलती हुए मार्किट और टेक्नोलॉजी से कितना अपडेट हैं आप. किसी भी सॉफ्टवेयर या प्लगइन का नया वर्जन आने में अब साल भर भी नहीं लगता है, वहीं आपके कस्टमर की जरूरतें पूरी करने के लिए आपको लगातार अध्ययन करने की जरूर है. इसलिए इंजीनियरिंग में आपने बेशक पढाई नहीं की हो, किन्तु यहाँ आपको सम्बंधित सक्रीय लोगों के ब्लॉग, टेक्नोलॉजी अपडेट लगातार समझना होगा, अन्यथा आपको आउटडेटिड होते देर नहीं लगेगी. [Read Blogs continuously]
अपने फिल्ड के खुद विशेषज्ञ बनें, किसी एम्प्लोयी के ज्ञान के ऊपर निर्भर होना आपकी कंपनी के लिए घातक साबित हो सकता है. [Be an expert for your website business]
इसके लिए आप फोटोशॉप, ड्रीमवीवर, फ़्लैश, कोरलड्रा, एमएस ऑफिस, CSS, HTML इत्यादि की अच्छी जानकारी होना आवश्यक है, क्योंकि वेबसाइट के व्यापार में इनका प्रयोग होगा ही होगा. [Essential softwares for website design are photoshop, coreldraw, ms-office, css and html]
इसके अतिरिक्त मानव सम्बन्धी गुण तो जरूरी हैं ही, मसलन धैर्य, ईमानदारी, अर्थ-प्रबंधन, अखंड मेहनत, दूरदर्शिता, आत्मविश्वास और इन सबसे बढ़कर निर्णय लेने का साहस. [Human Values is necessary for success like patience, honesty, economy management, hard labour, confidence and courage]


तो अब आप इन टिप्स की सहायता से मार्किट में अपना वेबसाइट-व्यापार शुरू करने के लिए तैयार हैं. बाकि आपको इस विषय से सम्बंधित और जानकारियां मेरी वेबसाइट पर मिलेंगी. आप मुझे मेरे ईमेल पर भी संपर्क करके सलाह दे सकते हैं, ले सकते हैं.
आपका अपना- मिथिलेश


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