बातें कुछ अनकही सी...........: मैं चिराग हूँ बुझता हुआ ही सही,मगर याद रहे

02 अगस्त 2017   |  युगेश कुमार   (251 बार पढ़ा जा चुका है)

बातें कुछ अनकही सी...........: मैं चिराग हूँ बुझता हुआ ही सही,मगर याद रहे

मैं चिराग हूँ बुझता हुआ ही सही,मगर याद रहे

तुम्हारे दिल-e-मकान को रौशन,हमने ही किया था।

ये किसी और से तिश्नगी जायज़ है तुम्हारी,मगर याद रहे

मोहब्बत से रूबरू हमने ही किया था।

चली जाओ किसी गैर की बाहों में गम नहीं, मगर याद रहे

तेरे दिल की आवाज़ को धड़कन,हमने ही दिया था।

तुम आज भी बारिश में जरूर भीगती होगी,मगर याद रहे

तुम्हारे बदन पर उन बूँदों का एहसास,हमने ही दिया था।

तुम तो यूँ ही नादान सी निकल जाती थी उस गली में,मगर याद रहे

उस पायल की मीठी झनक को महसूस,हमने ही किया था।

आज जो ये दूरियाँ हैं,बंदिशें ही सही,जो भी हो,मगर याद रहे

कुछ दर्द हमने लिया था,कुछ दर्द तुमने दिया था।

आज जो पहुँचा हूँ इस मक़ाम पर,खुश हूँ,मगर याद रहे

समेट रहा हूँ खुद को,थोड़ा टूटा था,बिखेर तुमने दिया था।

©युगेश

बातें कुछ अनकही सी...........: मैं चिराग हूँ बुझता हुआ ही सही,मगर याद रहे

http://yugeshkumar05.blogspot.in/2017/08/blog-post.html

बातें कुछ अनकही सी...........: मैं चिराग हूँ बुझता हुआ ही सही,मगर याद रहे



उत्तम

युगेश कुमार
03 अगस्त 2017

शुक्रिया

बढ़िया

युगेश कुमार
03 अगस्त 2017

धन्यवाद्

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x