“मुक्तक” रहती है खुशी किस गली में

11 अगस्त 2017   |  महातम मिश्रा   (130 बार पढ़ा जा चुका है)

मापनी- २२२१ २२१२ २.....


“मुक्तक”


रहती है खुशी किस गली में

खिलते हैं पुष्प भी कली में

कोई तो बताए वो खिली क्या

चहकी क्या हँसके भल भली में॥-१


कहते हैं अभी वो नदां है

फूलों में दिखी जो जुदा है

आमोदी लगी सुख भरी सी

जिन मन में दया वो खुदा हैं॥-२



महातम मिश्र ‘गौतम’ गोरखपुरी

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