सार छंद [सम मात्रिक]

14 अगस्त 2017   |  महातम मिश्रा   (164 बार पढ़ा जा चुका है)

सार छंद [सम मात्रिक]


महिमा गुरु की हो जाये तो

तट लग जाये नैया।

शुद्ध ज्ञान गीता से आये

जय हो कृष्ण कन्हैया।।-१


भगत भाव भगवान बहूते

नाचे ताता छैया।

वन बिन मोर ढेलनी कैसी

ये किन छवि है दैया।।-२


होगी कैसे शुद्ध भावना

करो जतन कुछ भैया।

मन को धन से दूर करो

जीधन है निर्मल गैया।।-३


महातम मिश्र 'गौतम' गोरखपुरी

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