“हाइकु”

23 अगस्त 2017   |  महातम मिश्रा   (55 बार पढ़ा जा चुका है)

“हाइकु”


छूटा बंधन

मुँह में मिठाइयाँ

सत्य की जीत॥-१


घिनौना स्वार्थ

हाय तोबा दुहाई

वो शहनाई॥-२


बहाना बाजी

राह मील पत्थर

मोह मंजिल॥-३

वापस आई

पटरी पर रेल

सुखद यात्रा ॥-४


डाली का बौर

अपने अपने बाग

प्यार मुहब्बत॥-५


सबका धर्म

स्त्री पुरुष मानव

दया करुणा॥-६


वो काली रात

भयानक सपना

सुबह हुई॥-७


महातम मिश्र ‘गौतम’ गोरखपुरी

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