मुक्तक

01 सितम्बर 2017   |  महातम मिश्रा   (120 बार पढ़ा जा चुका है)

(शीर्षक--- अचल, अटल, अडिग, अविचल, स्थिर, दृढ़ आदि समानार्थक शब्द, मापनी- 1222, 1222, 1222, 1222 ..... ॐ जय माँ शारदे.........! " मुक्तक " अटल मेरा विश्वास हुआ तुम्हें निरखकर रे साथी अविचल अडिग कभी न हुआ तुम्हें लिपटकर रे साथी यही है जीत अफसाना लिए चलते नयन तके नजारों को स्थिर अचल चाल यह मेरी तुम्हें समझकर रे साथी।। महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

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