फूलो के इम्तिहान का

06 सितम्बर 2017   |  शिवदत्त   (80 बार पढ़ा जा चुका है)

फूलो के इम्तिहान का

कवि: शिवदत्त श्रोत्रिय

मंदिर में काटों ने अपनी जगह बना ली
वक़्त आ गया है फूलो के इम्तिहान का ||

सावन में भीगना कहाँ जुल्फों से खेलना
बारिश में जलता घर किसी किसान का ||

हालात बदलने की कल बात करता था
लापता है पता आज उसके मकान का ||

निगाह उठी आज तो महसूस करता हूँ
लाल सा दिखने लगा रंग आसमान का ||

लुटेरों की हुक़ूमत जहाजों पर हो गयी
अंदाजा किसे है दरिया के नुकसान का ||

आइना कहाँ दुनियाँ की नजर में "शिव"
अपने ही सबूत मांगते तेरी पहचान का ||

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अलोक सिन्हा
07 सितम्बर 2017

शिव दत्त जी ! सच , बहुत अच्छी गजल है |

शिवदत्त
07 सितम्बर 2017

बहुत बहुत शुक्रिया आलोक जी, आभार आपका

बहुत बढ़िया

शिवदत्त
07 सितम्बर 2017

आभार आपका ...

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