जिस रात उस गली में

14 सितम्बर 2017   |  शिवदत्त   (95 बार पढ़ा जा चुका है)

रौशनी में खो गयी कुछ बात जिस गली में

वो चाँद ढूढ़ने गया जिस रात उस गली में ||


आज झगड़ रहे है आपस में कुछ लुटेरे

कुछ जोगी गुजरे थे एक साथ उस गली में ||


कुछ चिरागो ने जहाँ अपनी रौशनी खो दी

क्यों ढूढ़ता है पागल कयनात उस गली में ||


मौसम बदलते होंगे तुम्हारे शहर में लेकिन

रहती है आँशुओं की बरसात उस गली में ||


सूरज को भी ग्रहण लगता है हर एक साल

बदलेंगे एक दिन जरूर हालात उस गली में ||

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रेणु
16 सितम्बर 2017

प्रिय शिव बहुत अच्छी गजल रची आपने ------ सभी शेर मन को छूने वाले है ---------- सस्नेह शुभकामना

शिवदत्त
18 सितम्बर 2017

बहुत बहुत आभार आपका, सब आपका स्नेह है. ........

अलोक सिन्हा
15 सितम्बर 2017

शिव दत्त जी ! अच्छी गजल है |

शिवदत्त
15 सितम्बर 2017

आभार आलोक जी आपका

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