अपनी अस्मिता क़ुर्बान करनी चाहिए थी ?

27 सितम्बर 2017   |  रवीन्द्र सिंह यादव   (219 बार पढ़ा जा चुका है)

कुलपति साहब तो क्या

उस छात्रा को
संस्थान की अस्मिता के लिए

अपनी अस्मिता
क़ुर्बान करनी चाहिए थी ?

बीएचयू के मुखिया को
ऐसी बयानबाज़ी करनी चाहिए थी ?


सभ्यता की सीढ़ियाँ
चढ़ता मनुष्य

पशुओं से अधिक
पाशविक व्यवहार पर
उतर आया है

साइकिल पर शाम साढ़े छह बजे
बीएचयू कैम्पस में हॉस्टल जाती

एक छात्रा के
वस्त्रों में
बाइक पर सवार होकर

हाथ डालने के संस्कार

किसी माँ-बाप ने
अपने अशिष्ट,मनोरोगी बेटे को दिये हैं ?



मीडिया प्रबंधन की
पोल खुल गयी है

विज्ञापनों के फेर में
मीडिया-मालिक की ज़ेहनियत पर

संवेदना की कलई अब धुल गयी है।



अफ़सोस कि वाराणसी एक तीर्थ है

जहाँ मानवता को
शर्मसार करने वाले भेड़िये पलते हैं

सर्वविद्या की सांस्कृतिक राजधानी में

वर्जनाओं की फ़ौलादी ज़मीं पर

सामंतवादी पुरुषसत्ता की टकसाल में
सांस्कृतिक बेड़ियों के सिक्के ढलते हैं।



धरने पर बैठी बेटियाँ

अपनी सुरक्षा के लिए

सड़क पर रात गुज़ारती हैं

अँधेरी रात में वे निहत्थी हैं फिर भी

पुरुष-पुलिस की सर पर लाठियां खाती हैं

कमाल का मलाल है बनारसी लोगों के मन में

उन्हें अफ़सोस है कि प्रधानमंत्री के काफ़िले का रुट बदलने से

उनके द्वार की मिटटी पवित्र न होने पाई ... .!

सुनो !

खोखली मान्यताओं के पहरेदारो

बेटी है अब सड़क पर उतर आई
नए मूल्यों की इबारत लिखने से रोक पाओगे ?

सुनो!

पशुओं को भी लज्जित कर देने वाले दरिंदो

तुम भी किसी के जीवनसाथी क्या अब बन पाओगे ?

तुम भी किसी बहन के हो भाई

या किसी बेटी के बनोगे बाप..!

तुम्हारा ज़मीर जाग जाय तो अच्छा है

वरना जीवनभर अंधकार में भटकोगे कचोटेगा संताप..!



ख़ुफ़िया-तंत्र को चुल्लूभर पानी काफ़ी है

हमारी ओर से उसे नहीं कोई माफ़ी है।

ख़बर है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की
नींद आज खुल गयी है

राष्ट्रीय महिला आयोग की
न जाने क्यों घिग्घी बंध गयी है ?

#रवीन्द्र सिंह यादव


बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में हुई छेड़छाड़ की अभद्र घटना पर मेरा लेख -

राष्ट्रवाद की चालाक व्याख्या में पिसती छात्राओं की आज़ादी

https://hamaraakash.blogspot.in/2017/09/blog-post.html

शब्दार्थ / पर्यायवाची। WORD MEANINGS
कुलपति= विश्वविद्यालय का शीर्ष अधिकारी /VICE CHANCELLOR
संस्थान - INSTITUTE


अस्मिता = गौरव ,गरिमा , अभिमान ,पहचान / PRIDE


क़ुर्बान= मिटा देना(स्वयं को ) , बलिदान करना , त्याग करना / SACRIFICE


बीएचयू = बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी


पाशविक व्यवहार= पशुओं जैसा बर्ताव , नृशंस व्यवहार /BEHAVE LIKE ANIMAL, BRUTAL ACTIVITIES


साइकिल = मानवीय ऊर्जा से चालित दो पहिया वाहन / BICYCLE (BI = दो , CYCLE = चक्र / पहिया अर्थात जिसमें दो पहिये हों )
बाइक = मोटर साइकिल, स्वचालित दो पहिया वाहन / MOTOR CYCLE /BIKE
अशिष्ट = असभ्य , शिष्टाचार से परे ,बदतमीज़ ,गुस्ताख़ / UNCIVILIZED

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रेणु
28 सितम्बर 2017

आदरणीय रविन्द्र जी --- सामयिक ज्वलंत विषय पर आपकी ये विचारोत्तेजक रचना झझकोरने वाली है | एक सच्चे कवि और चिन्तक की सार्थक फटकार मन को छू जाती है | एक संस्कारी और शिक्षित राष्ट्र के एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में बेटियों के साथ अभद्र व्यवहार सचमुच घोर निंदनीय है | उस पर सामूहिक मौन !? ! बेहद दर्दनाक और शर्मनाक है | इस अशिष्टता से महामना मालवीय जी की आत्मा को बहुत संताप हो रहा होगा - जिन्होंने समाज के सुखद. शिक्षित भविष्य की परिकल्पना कर इस अनुपम संस्था की नींव रखी थी | लानत है ऐसे लोगों पर जो घर में आदर्श बेटा , भाई और पिता हैं पर घर से बाहर आकर एक नृशंस भेडिये की शक्ल में परिवर्तित हो जाते हैं | जिस दिन ये दोहरे मापदंड संपत हो जायेंगे -- देश की बेटियों के स्वर्णिम दिन आ जायेंगे | हमारी बेटियां समस्याओं से जूझकर बाहर निकलने में सक्षम हैं | पर उनके साथ अभद्र व्यवहार दुखद तो है ही- कुलपति का गैर जिम्मेदार बयान और भी हैरान करता है !!!!! कठिन शब्दों के अर्थ लिख रचना को समझ पाने में सरलता तो होती ही है साथ ही शब्द ज्ञान भी बढ़ता है | सार्थक रचना के साथ हिंदी पाठकों के लिए आपका ये योगदान अतुलनीय है और मुक्त कंठ से सराहने योग्य है | सादर शुभकामना आपको |

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