गीत --- याद न तब भूली जायेगी

27 सितम्बर 2017   |  अलोक सिन्हा   (95 बार पढ़ा जा चुका है)

याद न तब भूली जायेगी |


रवि का रथ ओझल होने पर ,

सांझ अनमनी सुधियाँ लेकर ,

बैठी विकल चकोरी कोई ,

तारों से मन बहलायेगी |

याद न तब भूली जायेगी |


मुस्काकर दो पल आंगन में ,

मौन दुपहरी के दामन् में ,

कोई कलिका जब खिलने से -

पहले ही मुरझा जायेगी |

याद न तब भूली जायेगी |


धीरे से उपवन में आकर ,

गरम गरम मस्तक सहलाकर ,

शीतल पवन धूप से व्याकुल ,

फूलों को जब दुलरायेगी |

याद न तब भूली जायेगी |


निशि भर कभी किसी निवास से ,

घर के बिलकुल बहुत पास से ,

शहनाई की मीठी मीठी ,

धुन जब कानों में आयेगी |

याद न तब भूली जायेगी |


पास किसी तरु की डाली पर,

अपनी मस्ती में इठलाकर ,

मधुऋतु में जब काली कोयल .

गीत मगन होकर गायेगी |

याद न तब भूली जायेगी |


थकन मिटाने को निज तन की ,

पीड़ा पीकर के जीवन की ,

दो पल जब निशि की छाया में ,

सारी दुनियां सो जायेगी |

याद न तब भूली जायेगी |

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रेणु
25 जुलाई 2018

आदरणीय आलोक जी आपने लिखना क्यों छोड़ दिया ? कृपया अपनी रचना डालिए ना !!!!!

याद न तब भूली जायेगी,...बहुत ही सुन्दर भावाभिव्यक्ति गुरूजी|

रेणु
30 सितम्बर 2017

निशि भर कभी किसी निवास से ,
घर के बिलकुल बहुत पास से ,
शहनाई की मीठी मीठी ,
धुन जब कानों में आयेगी |
याद न तब भूली जायेगी !!!!!!!!!!!
कितनी सरस पंक्तियाँ हैं आदरणीय आलोक जी | यादों को भुलाना आसान नहीं होता | मन की विकल भावों को बड़े ही भावपूर्ण और मर्म स्पर्शी शब्द दिए आपने | आपको सुंदर रचना की बहुत बधाई -- साथ में विजयदशमी की ढेरों मगल कामनाएं मिले आपको | आप बहुत बहुत स्वस्थ और प्रसन्न रहे |

अलोक सिन्हा
01 अक्तूबर 2017

बहुत बहुत आभार रेणु जी

कुमार आशू
27 सितम्बर 2017

बहुत अच्छी कविता है ... यादों का मार्मिक विस्तार है👌
अलोक जी👍

अलोक सिन्हा
27 सितम्बर 2017

आशू जी -- बहुत बहुत आभार , धन्यवाद टिप्पणी के लिए |

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