मेमोरेंडम ऑफ़ फैमिली सेटलमेंट ''पारिवारिक निपटान के ज्ञापन '' का महत्व

08 अक्तूबर 2017   |  शालिनी कौशिक एडवोकेट   (334 बार पढ़ा जा चुका है)

 मेमोरेंडम ऑफ़ फैमिली सेटलमेंट ''पारिवारिक निपटान के ज्ञापन '' का महत्व

संपत्ति का विभाजन हमेशा से ही लोगों के लिए सरदर्द रहा है और कलह,खून-खराबे का भी इसीलिए घर के बड़े-बुजुर्ग हमेशा से इसी कोशिश में रहे हैं कि यह दुखदायी कार्य हमारे सामने ही हो जाये .इस सबमेँ करार का बहुत महत्व रहा है .करार पहले लोग मौखिक भी कर लेते थे और कुछ समझदार लोग वकीलों से सलाह लेकर लिखित भी करते थे लेकिन धीरे धीरे जैसे धोखाधड़ी बढ़ती चली गयी वैसे ही करार का लिखित होना और निश्चित कीमत के स्टाम्प पर होना ज़रूरी सा हो गया .

अब लगभग सभी करार सौ रूपये के स्टाम्प पर होते हैं क्योंकि सौ रूपये के स्टाम्प पर होने से करार का रजिस्टर्ड होना आसान हो जाता है .लेकिन इस सबके साथ एक बात यह भी है कि अब भी बहुत से करार ऐसे किये जा सकते हैं जो लिख भी लिए जाएँ और उनका रजिस्टर्ड होना ज़रूरी भी न हो .वैसे भी रजिस्ट्रेशन एक्ट ,१९०८ की धारा १७[२] कहती है कि

''१७[२][i ] किसी भी समझौता अभि लेख का रजिस्ट्रेशन ज़रूरी नहीं है ''

किन्तु ऐसा नहीं है कि इस धारा को मानकर आप सभी जगह समझौते को रजिस्टर्ड कराने से बचें .वास्तव में मैं यहाँ पारिवारिक समझौते से विभाजन की बात कर रही हूँ जिसके लिए कहा गया है कि विभाजन करार द्वारा भी हो सकता है क्योंकि इच्छा की घोषणा इसकी मुख्य कसौटी है .अतः यह इच्छा पक्षकार करार द्वारा भी घोषणा कर सकते हैं .अप्पुवीयर बनाम राम [१८६६] में कहा गया है कि

''यदि किसी करार के अंतर्गत पक्षकारों ने यह निश्चित किया है कि उनके हित पृथक-पृथक हो गए हैं तो यह विभाजन होगा चाहे संपत्ति का बंटवारा बाद में हो .'' इसी तरह पूरणदासी बनाम गोयल स्वामी १९३६ में प्रिवी कौंसिल ने कहा कि

''करार द्वारा विभाजन के लिए यह आवश्यक है कि पक्षकारों ने अपने हितों के तुरंत पृथक्करण की इच्छा व्यक्त की हो अन्यथा ऐसे करार द्वारा विभाजन नहीं होगा .'' और राम बनाम खुरा ,१९७१ में पटना उच्चन्यायालय ने कहा

''पृथक्करण की इच्छा को लिखित रूप देने वाला दस्तावेज पृथक्करण की मान्य साक्ष्य है .'' अब ऐसे में बहुत से लोग ये मानने लगते हैं कि यह करार लिखित भी हो और रजिस्टर्ड भी तभी इसकी मान्यता है जबकि कानून की ,सुप्रीम कोर्ट व् इलाहाबाद उच्चन्यायालय की राय थोड़ी अलग है . हिन्दू विधि में विभाजन का करार मौखिक भी हो सकता है . यह आवश्यक नहीं है कि करार लिखित ही हो .करार लिखित हो या मौखिक हो ,पृथक्करण की इच्छा स्पष्टरूपेण व्यक्त होनी चाहिए .नन्नी बनाम गीता १९५८ में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय इस विषय में महत्वपूर्ण दिशानिर्देश जारी करता है .इसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा -

''यदि करार लिखित है तो उसका रजिस्ट्रीकरण आवश्यक नहीं है क्योंकि यह पृथक्करण के कृत्य का अभिलेख है .''

लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि यह पृथक्करण उनमे करार से पहले ही हो चुका हो जैसे कि आम तौर पर भारतीय परिवार मतलब हिन्दू परिवार अब अपने घर में अलग अलग हिस्से बाँट लेते हैं और उनमे रहना शुरू कर देते हैं बस इस ज्ञापन में वे केवल अपनी याददाश्त के लिए उसे लिख लेते हैं और यही बात इसे रजिस्ट्रीकरण से मुक्त करने की सुप्रीम कोर्ट ने मानी है और इसीलिए कृष्णा बनाम रामनारायण में कलकत्ता उच्चन्यायालय ने साफ किया कि

''परन्तु यदि संपत्ति का बंटवारा करार द्वारा किया गया है तो करार की रजिस्ट्री आवश्यक है .विभाजन के करार के विधिक प्रभाव और परिणामों को पक्षकार किसी आचरण या कृत्य द्वारा नहीं बदल सकते है .'' रजिस्ट्रीकरण से मुक्ति के सम्बन्ध में सूरज सिंह सैनी बनाम जिला जज गाजियाबाद में २३ जनवरी २००२ को माननीय न्यायाधीश ए.के.योग जी ने कहा ''in the present case the document filed by the landlord was to be a memorandum of family settlement by the respondent no.2 and consequently no registration was required and the said document was admissible in evidence .''

स्पष्ट है कि मेमोरेंडम ऑफ़ फॅमिली सेटलमेंट का रजिस्ट्रेशन उक्त परिस्थितियों में ज़रूरी नहीं है और यह साक्ष्य में भी मान्य है . यही समझते हुए अभी हाल में ही नगरपालिका में दादा के नाम से पहले पोते के पिता के नाम में और फिर पोते द्वारा वारिसान सर्टिफ़िकेट दिलवाकर उसका अपने दादा की संपत्ति पर नाम चढ़वाने में सफलता पायी है .पोते को इतना इसलिए करना पड़ा क्योंकि उसके पिता ने लापरवाही की पर आप ऐसा न करें अगर आपके पास मेमोरेंडम ऑफ़ फैमिली सेटलमेंट है जो किसी योग्य वकील द्वारा उपरोक्त परिस्थितियों को समझते हुए तैयार किया गया हो तो फ़ौरन अमल में लाएं और कानूनी उलझनों से बचें .


शालिनी कौशिक [एडवोकेट]

[कानूनी ज्ञान ]

अगला लेख: पट्टा-लाइसेंस और मानस जायसवाल



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
10 अक्तूबर 2017
1992 में एक फ़िल्म आई थी, नाम था यलगार। फ़िल्म के एक सीन में 53 वर्षीय पुलिस इंस्पेक्टर फ़िरोज़ खान, जो फ़िल्म के प्रोड्यूसर, डायरेक्टर, एडिटर और ज़ाहिर हैं कि लीड हीरो भी थे, अपने 34 वर्षीय पिता कमिश्नर मुकेश खन्ना को फ़ोन पर कहते हैं कि जब आपको पता हैं कि दुनियां का सबसे खतरनाक कॉन्ट्रैक्ट किलर, कार्लोस,
10 अक्तूबर 2017
10 अक्तूबर 2017
दिल्ली -एनसीआर में ३१ अक्टूबर तक सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों की बिक्री पर रोक लगाई ही थी कि लेखक चेतन भगत उसकी भर्तसना भी करने लग गए यह कहते हुए कि ,''यह हमारी परंपरा का हिस्सा है बिना पटाखों के बच्चों की कैसी दिवाली ? उनकी इस ट्वीट की देखा देखी ठाकरे भी बोले तो क्या व्
10 अक्तूबर 2017
01 अक्तूबर 2017
हर महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को उत्तर प्रदेश के हर जिले में हर तहसील पर तहसील दिवस आयोजित किया जाता है .जिसमे कभी जिला मजिस्ट्रेट तो कभी उप-जिला मजिस्ट्रेट उपस्थित हो लोगों की समस्याओं को सुनते हैं और उनकी समस्याओं को देखते हुए तहसील स्तर के विभागों से जिन कर्
01 अक्तूबर 2017
09 अक्तूबर 2017
वो चेहरा जो शक्ति था मेरी , वो आवाज़ जो थी भरती ऊर्जा मुझमें , वो ऊँगली जो बढ़ी थी थाम आगे मैं , वो कदम जो साथ रहते थे हरदम, वो आँखें जो दिखाती रोशनी मुझको ,वो चेहरा ख़ुशी में मेरी हँसता था , वो चेहरा दुखों में मेरे रोता था , वो आवाज़ बाते
09 अक्तूबर 2017
21 अक्तूबर 2017
''प्रमोशन के लिए बीवी को करता था अफसरों को पेश .''समाचार पढ़ा ,पढ़ते ही दिल और दिमाग विषाद और क्रोध से भर गया .जहाँ पत्नी का किसी और पुरुष से जरा सा मुस्कुराकर बात करना ही पति के ह्रदय में ज्वाला सी भर देता है क्या वहां इस तरह की घटना पर यकीन किया जा सकता है ?किन्तु चाहे अनचाहे यकीन करना पड़ता है
21 अक्तूबर 2017
29 सितम्बर 2017
शब्दों का अपने-आप में कोई खास महत्व नही। चारों ओर शब्द ही शब्द हैं। मगर, फिर भी उनका किसी पर असर हो, इसके लिए शब्दों की अच्च्छाई और उपयोगिता तभी बन पाती है जब शब्दों को बेहद उम्दा और ढेर सारे प्यार, आस्था और अपनेपन से स्वीकार किया जाए।शब्द तभी कामयाब और असरदार होते हैं जब उनको सुनने वाले की कहने वाल
29 सितम्बर 2017
08 अक्तूबर 2017
''दरों दीवार पे हसरत से नज़र रखते हैं , खुश रहो अहले वतन हम तो सफर करते हैं .'' कह एलम का नौजवान गौतम पंवार भी अपने देश पर शहीद हो गया और नाम रोशन कर गया न केवल अपने छोटे से कसबे एलम का बल्कि पूरे प्रदेश का जहाँ से कोई भी अब ये नहीं कह सकता कि यहाँ की मिटटी में
08 अक्तूबर 2017
01 अक्तूबर 2017
एक की लाठी सत्य अहिंसा एक मूर्ति सादगी की, दोनों ने ही अलख जगाई देश की खातिर मरने की . .......................................................................... जेल में जाते बापू बढ़कर सहते मार अहिंसा में , आखिर में आवाज़ बुलंद की कुछ करने या मरने की . ..................................
01 अक्तूबर 2017
20 अक्तूबर 2017
मेरी पिछली पोस्ट ''पारिवारिक निपटान आलेख और मानस जायसवाल ''में मानस जायसवाल जी ने एक प्रश्न और पूछा था ,जो कुछ इस प्रकार था - धन्यवाद शालिनी जी, अभी भी एक सवाल बाकी है | अपने वाद के अनुसार पूछता हूँ| पाकिस्तान से विस्थापित होकर आए 3 भाई एक नए शहर में बस गए| उन्होंने खुली नीलामी में अलग
20 अक्तूबर 2017
01 अक्तूबर 2017
अष्टमी का दिन... सुबह के नौ-सवा नौ का वक्त... वो मिली मुझे...!अम्मा को पूजा के फूल चाहिये थे सो सीधा पड़ोस के मंदिर पहुंचा।पहले भी तो कई दफे आ चुका हूं मगर वो पहली बार दिखी मुझे...तिबत्ती थी वो... छोटी सी... बहुत संुदर... देवतुल्य...!उजले सफेद बाल, लाल रंग की मुड़ी-तुड़ी पोशाक... बामुश्किल उसकी छोटी-छो
01 अक्तूबर 2017
24 सितम्बर 2017
''शादी करके फंस गया यार , अच्छा खासा था कुंवारा .'' भले ही इस गाने को सुनकर हंसी आये किन्तु ये पंक्तियाँ आदमी की उस व्यथा का चित्रण करने को पर्याप्त हैं जो उसे शादी के बाद मिलती है .आज तक सभी शादी के बाद नारी के ही दुखों का रोना रोते आये हैं किन्तु क्या कभी गौर किया उस विपदा का जो आदमी के गले
24 सितम्बर 2017
24 सितम्बर 2017
हमारे एक चचा जान हमारी रोज बढ़ती औकात से हमेशा दो मुट्ठी ज्यादा ही रहे। इसलिए, भले ही कई मुद्दों पर उनसे हमारी मुखालफत रही पर उनकी बात का वजन हमने हमेशा ही सोलहो आने सच ही रक्खा।वो हमेशा कहते, जो भी करो, सुर में करो, बेसुरापन इंसानियत का सबसे बड़ा गुनाह है। लोग गरीब इसल
24 सितम्बर 2017
14 अक्तूबर 2017
पलायन मुद्दे के शोर ने कैराना को एकाएक चर्चा में ला दिया ,सब ओर पलायन मुद्दे के कारण कैराना की बात करना एक रुचिकर विषय बन गया था ,कहीं चले जाओ जहाँ आपने कैराना से जुड़े होने की बात कही नहीं वहीं आपसे बातचीत करने को और सही हालात जानने को लोग एकजुट होने
14 अक्तूबर 2017
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x