गौतम से पहले मुनेश को सलाम

08 अक्तूबर 2017   |  शालिनी कौशिक एडवोकेट   (169 बार पढ़ा जा चुका है)

''दरों दीवार पे हसरत से नज़र रखते हैं ,

खुश रहो अहले वतन हम तो सफर करते हैं .''

कह एलम का नौजवान गौतम पंवार भी अपने देश पर शहीद हो गया और नाम रोशन कर गया न केवल अपने छोटे से कसबे एलम का बल्कि पूरे प्रदेश का जहाँ से कोई भी अब ये नहीं कह सकता कि यहाँ की मिटटी में केवल नेता ही जन्म लेते हैं .गौतम की निपुणता के मुरीद थे अफसर .एक युवा ,बहादुर नौजवान का इस तरह चले जाना बहुत दुखद है और सबसे ज्यादा उस माँ के लिए जो अपना जीवन अपने बच्चों के लिए ही कुर्बान कर देती है .

जानती हूँ मेरी पोस्ट का शीर्षक सबको अजीब लगेगा और कुछ को तो गुस्सा भी आ जायेगा किन्तु मैं यहाँ गौतम से भी ज्यादा बड़ी शहादत देख रही हूँ मुनेश की जो सौभाग्य से गौतम के ही कहूँगी ,माँ है , समाचार पत्र से ही पता लगा कि मुनेश देवी के पति तो नौकरी के कारण घर से बाहर ही रहते थे और मुनेश देवी ने ही अपने तीनों बच्चों में वो प्रेरणा उत्पन्न की कि वे देश सेवा के योग्य बन सके . माँ का रिश्ता होता ही ऐसा है जो अपने बारे में कुछ नहीं सोचता ,उसके मन में चौबीस घंटे अपने बच्चे की चिंताएं हावी रहती हैं ,ऐसे में अपने लाल के यूँ बिछड़ जाना कि अब कभी नहीं मिलेगा ,सोचना भी ह्रदय विदारक है फिर यहाँ तो ये हो गया .

पर हम जानते हैं जो माँ अपने एक बेटे के गम में डूबी हुई भी हो वह अपने और बच्चों की बेहतरी के लिए अपने ह्रदय पर पत्थर रख ही लेती है और यही अब मुनेश को भी करना है ,अर्जुन और वैशाली भले ही सेना में हों ,पुलिस में हों लेकिन मुनेश के बच्चे हैं और इनके लिए माँ अपने फ़र्ज़ को निभाएगी ,हमेशा से निभाती आयी है ,क्योंकि हम तो सिवाय सांत्वना के उन्हें कुछ नहीं दे सकते केवल इतना कह सकते हैं कि भगवान गौतम की आत्मा को शांति दे [ जिसे कहने की कोई आवश्यकता ही नहीं है क्योंकि वह देश पर कुर्बान हुआ है और देश पर कुर्बान होने वालों को तो स्वयं भगवान भी सलाम करते हैं ]और उसके परिजनों को यह दुःख सहन करने की शक्ति दे . गौतम पंवार को सलाम और उनसे भी पहले मुनेश को मेरा बार बार सलाम क्योंकि आपने माँ का पद एक बार फिर नमन योग्य बना दिया है .बस अब केवल यही -

ए मेरे वतन के लोगों, ज़रा आँख में भर लो पानी ,

जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो क़ुरबानी .''

जय हिन्द -जय गौतम -जय मुनेश


शालिनी कौशिक [कौशल ]

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रेणु
13 अक्तूबर 2017

आदरणीय शालिनी जी बहुत ही मर्मस्पर्शी लेख पढ़कर आँखें भर आयीं | समझ में नहीं आता कि इन माँ ओं को कौन सी सांत्वना दी जाए की वो सरलता से दुःख भूल जाएँ !!!!!!!!! पर क्या ये संभव है अपार संभावनाओं से भरे युवा बेटे का यूँ चले जाना कोई भुला सकता है क्या ? कौन है जो धारज धर पाटा है फिर भी देश पर मिटना अपने आप में गौरवशाली क्षण ले कर आता है | सचमुच वो जज्बा अपने बच्चो में बोने वाली माँ को हजारों सलाम !!!!!!!!!!!!!!!! कोटिश नमन और वंदन |

बस यही करना है हमें और करना भी चाहिए ----------------
जिन्होंने वारे लाल देश पे
नमन करो उन माओं को ,
जिनके मिटे सुहाग देश - हित
शीश झुकाओं उन ललनाओं को |

दे सर्वोच्च बलिदान जीवन का
मातृभूमि की लाज बचाई
जिनकी बदौलत आज आजादी
हो सत्तर की इतरायी
यशो गान रचो उन वीरों के
गाओ गौरव की उन गाथाओं को !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
सादर सस्नेह ---------










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