.... ...जननी गयी हैं मुझसे रूठ .

09 अक्तूबर 2017   |  शालिनी कौशिक एडवोकेट   (92 बार पढ़ा जा चुका है)

.... ...जननी गयी हैं मुझसे रूठ .

वो चेहरा जो

शक्ति था मेरी ,

वो आवाज़ जो

थी भरती ऊर्जा मुझमें ,

वो ऊँगली जो बढ़ी थी

थाम आगे मैं ,

वो कदम जो

साथ रहते थे हरदम,

वो आँखें जो दिखाती

रोशनी मुझको ,

वो चेहरा

ख़ुशी में मेरी हँसता था ,

वो चेहरा

दुखों में मेरे रोता था ,

वो आवाज़

बातें ही बतलाती ,

वो आवाज़

गलत करने पर धमकाती ,

वो ऊँगली बढाती

कर्तव्य-पथ पर ,

वो ऊँगली

भटकने से थी बचाती ,

वो कदम

निष्कंटक राह बनाते ,

वो कदम

साथ मेरे बढ़ते जाते ,

वो आँखें

सदा थी नेह बरसाती ,

वो आँखें

सदा हित ही मेरा चाहती ,

मेरे जीवन के हर पहलू

संवारें जिसने बढ़ चढ़कर ,

चुनौती झेलने का गुर

सिखाया उससे खुद लड़कर ,

संभलना जीवन में हरदम

उन्होंने मुझको सिखलाया ,

सभी के काम तुम आना

मदद कर खुद था दिखलाया ,

वो मेरे सुख थे जो सारे

सभी से नाता गया है छूट ,

वो मेरी बगिया की माली

जननी गयी हैं मुझसे रूठ ,

गुणों की खान माँ को मैं

भला कैसे दूं श्रद्धांजली ,

ह्रदय की वेदना में बंध

कलम आगे न अब चली .


शालिनी कौशिक

[कौशल ]

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रेणु
11 अक्तूबर 2017

आदरनीय शालिनी जी ---- माँ हम बेटियों में सदा जीवित रहती है अपने संस्कार और संवेदनाओं के रूप में | दर्द की रिश्ता जो होता है माँ बेटी का | हम उन्ही की परछाई हैं | पर फिर भी सशरीर माँ का न होना बहुत मर्मान्तक होता होगा \ भाग्यशाली हूँ मैं माँ साथ है | सस्नेह सांत्वना आपको

ऐसा भाग्य आपका सदैव बना रहे .हार्दिक शुभकामनाओं के साथ

रेणु
09 अक्तूबर 2017

आदरणीय शालिनी जी -- मुझे पता नहीं ये मात्र एक रचना है या सचमुच किसी ने ममता की देवी ' माँ ' को खोया है पर ये एक संवेदन शील मन के भावपूर्ण रुदन है जो पढने वाले के मन में सन्नाटे व्याप्त कर देते है | क्या कहूँ ? निशब्द हूँ !!!!!!!!! इस पीड़ा की कोई सांत्वना नहीं बहना !!!!!!!!!!!!

ये सत्य है रेनू जी ,आज मेरी माँ की पुण्यतिथि है .सांत्वना हेतु हार्दिक धन्यवाद्

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