“दोहा-मुक्तक”

13 अक्तूबर 2017   |  महातम मिश्रा   (55 बार पढ़ा जा चुका है)

“दोहा-मुक्तक”


घर की शोभा आप हैं, बाहर में बहुमान

भवन सदन सुंदर लगे, जिह्वा मीठे गान

धाम धाम में वास हो, सद आचरण निवास

भक्ती भक्त शिवामयी, शक्ति गुणी सुजान॥-१


घर मंदिर की मूर्ति में, संस्कार का वास

प्रति मनके में राम हैं, प्रति फेरा है खास

सबके साथ निबाहिए, अंगुल अंगुल जाप

निशा दिवाकर अरु प्रभा, सबके संग निवास॥-२


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

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