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01 नवम्बर 2017
रोशनी?? ,जी मेमसाहब ,मैं बस बर्तन साफ करके आती हूँ ,कुछ काम जो बाकी है जो जल्दी ही खत्म करके ही घर जाऊँगी। "हाँ"और कुछ कपड़े है वो लिए जाना रिया को पसन्द थे सो उसने तुम्हारी बेटी रुचि को देने को बोला है।ये बोलकर भारती अपने बेडरूम में चली गयी। "मेमसाहब" हाँ बोलो फ़ोन में व्यस्त भारती ने ऐसे बेपरवाह होक
01 नवम्बर 2017
14 अक्तूबर 2017
मे
सर्द सी रात और वो जनवरी की मुलाकाततुम्हारा वो प्यार,मेरा वो तुमसे मोहब्बत का इजहारवो तेरा सुहाना सा सफर और वो जनवरी की हमारी पहली मुलाकात, तुम्हारा मेरी ज़िंदगी मे आनाऔर ज़िन्दगी का एक पल का सफर उम्र भर का तुम्हारा साथ और तुम्हारा वो अपनेपनका एक एहसास, और तुमसे मिलने का
14 अक्तूबर 2017
31 अक्तूबर 2017
*गर्म लावे* ✍संजीव खुदशाह मै जानता हूं, अगर मै कुछ कहता ये मेरी जीभ काट ली जाती। मै जानता हूं, अगर मै कुछ सुनता मेरे कानों में गर्म लावे ठूंस दिये जाते। जिसे बताते थे तुम अपना, रहस्य खजाने का जिस पर तुम आध्यात्म के नाम पर इठलाते थे इतना मैने आज इनको पढ़ लिया है। जान लिया है वो कारण, जीभ को काटने का
31 अक्तूबर 2017
11 अक्तूबर 2017
दि
हाले दिल पूँछा,ना तुमने, ना हमनेऔर, दिल की बातें दिल में ही रह गयींनज़रें, ना तुमने पढ़ीं, ना हमनेऔर, दिल की बातें दिल में ही रह गयींइशारे, ना तुमने समझे, ना हमनेऔर, दिल की बातें दिल में ही रह गयींज़स्बातों का इज़हार,ना तुमने किया, ना हमनेऔर, दिल की बातें दिल में ही रह गयींप्यार करते हैं बेइंतहा तुम
11 अक्तूबर 2017
19 अक्तूबर 2017
अब कहाँ रौशनी कैसी परछाईंयाँबस अंधेरों के मेले हैं तनहाइयाँ ...!खोए नग़मे सा अब ढूँढता हूँ तुम्हेंछोड़कर यूँ मुझे गुम हुए तुम कहाँ ...!तुम बिना है अधूरा सा संसार सबख़ाली ख़ाली सा है ज़िन्दगी का मकाँ ...!है तुम्हारे बिना हर तरफ़ तीरगी कैसी दीपावली कैसा रौशन जहाँ ...!सोचता हूँ फ़क़त देखकर ये चमकजल उठे काश फ़ि
19 अक्तूबर 2017
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