"विधा- दोहा"

25 अक्तूबर 2017   |  महातम मिश्रा   (47 बार पढ़ा जा चुका है)

"विधा- दोहा"


रे रंगोली मोहिनी, कैसे करूँ बखान

विन वाणी की है विधा, मानों तुझमे जान।।-१


भाई दूजी पर्व है, झाँक रहा है चाँद

नभ तारे खुशहाल हैं, अपने अपने माँद।।-२


झूम रही है बालियाँ, झलक उठे खलिहान

पुअरा तपते खेत में, कहाँ गए धन धान।।-३


नौ मन गेंहूँ भरि चले, बीया बुद्धि बिहान

पानी छलके खेत में, सैंया मोर किसान।।-४


मौसम बदले शाम को, सर्दी खाँसी छींक

पूनम खिलती चाँदनी, लगती मन को नीक।।-५


मेरे भाई आप है, नेता अति गंभीर

कैसे जल्दी हो गए, धनी कुबेर अमीर।।-६


कुछ तो आप बताइए, कैसे फूले फूल

कुछ दिन पहले आप के, थी माथे पर धूल।।-७


भैया जी सेवा करो, अब तो भर ली जेब

इतना कैसे बढ़ गए, कही न कोई ऐब।।-८


अब तो चिंता हो रही, काले धन की छाप

कुरता भी अति साफ है, नेता साहब आप।।-९


देश विदेशा घूम के, ले ली सगरी सीख

भाई जी मत माँगिए, अब जनता से भीख।।-१०


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

अगला लेख: आइए जी आज से हम दिल लगाना सीख लें, “गीतिका”



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
27 अक्तूबर 2017
“पिरामिड”क्यों सभी सजाते खड़कातेबर्तन भाँड़ेरोटी सब्जी दाल महकती थाली क्या॥-१ये जग वो मग पानी रखें प्यास बुझाएँ किसका आँगन प्रिय पात्र साजन॥-२ महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी
27 अक्तूबर 2017
12 अक्तूबर 2017
“कुंडलिया”अपनी गति सूरज चला, मानव अपनी राह ढ़लता दिन हर रोज है, शाम पथिक की चाह शाम पथिक की चाह, अनेकों दृश्य झलकते दिनकर आए हाथ, चाँदनी चाँद मलकते “गौतम” छवि दिनमान, वक्त पर जलती तपनीपकड़ तनिक अभिमान, शुद्ध कर नीयत अपनी महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी
12 अक्तूबर 2017
06 नवम्बर 2017
“गीतिका”खुलकर नाचो गाओ सइयाँ, मिली खुशाली है अपने मन की तान लगाओ, खिली दिवाली है दीपक दीपक प्यार जताना, लौ बुझे न बातीचाहत का परिवार पुराना, खुली पवाली है॥कहीं कहीं बरसात हो रही, सकरे आँगन मेंहँसकर मिलना जुलना जीवन, कहाँ दलाली है॥होना नहीं निराश आस से, सुंदर अपना घर नीम छ
06 नवम्बर 2017
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x