झगड़ें नहीं राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत याद करें

05 नवम्बर 2017   |  विजय कुमार शर्मा   (46 बार पढ़ा जा चुका है)

जन गण मन अधिनायक जय हे वंदे मातरम्

भारत भाग्यविधाता सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्

पंजाब सिन्धु गुजरात मराठा सस्य श्मामलां मातरम्

द्राविड़ उत्कल बंगा शुभ्र ज्योत्सनाम् पुलकित यामिनम्

विन्ध्य हिमाचल यमुना गंगा फुल्ल कुसुमित द्रुमदलशोभीनीम ,

उच्छल जलधि तरंगा सुहासिनी सुमधुर भाषिणीम्

तव शुभ नामे जागे सुखदां वरदा मातरम्

तव शुभ आशीष मांगे सप्त कोटि कन्ठ कलकल निनाद कराले

गाहे तव जयगाथा द्विसप्त कोटि भुजैर्ध्रत खरकरवाले

जन गण मंगलदायक जय हे के बोले मा तुमी अबले

भारत भाग्यविधाता बहुबल धारिणीम् नमामि तारिणीम्

जय हे, जय हे, जय हे रिपुदलवारिणीम् मातरम् II

जय जय जय जय हे! तुमि विद्या तुमि धर्म, तुमि ह्रदि तुमि

मर्म

त्वं हि प्राण: शरीरे

बाहुते तुमि मा शक्ति,

ह्रदय तुमि मा भक्ति,

तोमारे प्रतिमा गडि मन्दिरे-मन्दिरे II

त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी

कमला कमलदल विहारिणी

वाणी विद्यादायिनी, नमामि त्वाम्

नमामि कमला अमलां अतुलाम्

सुजलां सुफलां मातरम् II

श्यामलां सरलां सुस्मितां भुषिताम्

धरणीं भरणीं मातरम् II

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