“पिरामिड”

08 नवम्बर 2017   |  महातम मिश्रा   (68 बार पढ़ा जा चुका है)

“पिरामिड”


रे

गुँजा

बावरी

मदमाती

उन्मुक्त बाँदी

घुँघराले बाल

लहराए नागिन॥-१


रे

गुँजा

भ्रामरी

सुनयना

घुँघची अली

मनचली गली

नव खेल खिलाती॥-२


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

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