आँगन में खेल रहे बच्चे ---------- बाल कविता ---

08 नवम्बर 2017   |  रेणु   (354 बार पढ़ा जा चुका है)

आँगन  में खेल रहे  बच्चे ---------- बाल कविता ---

आँगन में खेल रहे बच्चे ,

भोले भाले मन के सच्चे !


एक दूजे के कानों में -

गुप चुप से बतियाते हैं ,

तनिक जो हो अनबन आपस में -

खुद मनके गले मिल जाते है ;

भले -बुरे तर्क ना जाने

बस हैं थोड़े अक्ल के कच्चे !

आँगन में खेल रहे बच्चे !!


निश्छल राहों के ये राही -

भोली मुस्कान से जिया चुरालें ,

नजर भर देख ले जो इनको

बस हंसके गले लगा ले ;

अभिनय नहीं इनकी फितरत

जो मन में वो ही मुखड़े पे दिखे !

आंगन में खेल रहे बच्चे !!


इन नन्हे फूलों से आज -

ये आँगन का उपवन महक रहा है ,

सूना और वीरान था पहले -

अब कोना - कोना चहक रहा है ,

कौतुहल से भरे ये चुन- मुन--

मन के कोमल- शक्ल के अच्छे !

आँगन में खेल रहे बच्चे !!

अगला लेख: सुनो जोगी !------- कविता -



रत्नप्रिया
27 फरवरी 2019

बहुत ही सुंदर बचपन का अवलोकन।

रेणु
27 फरवरी 2019

प्रिय रत्नप्रिया आपका हार्दिक अभिनन्दन मेरे पेज पर | ये मंच आपके लिए शुभ हो मेरी यही कामना है | सस्नेह आभार

ममता
15 जनवरी 2018

सचमुच बचपन ऐसा ही होता है --

रेणु
09 फरवरी 2018

आभार !!!!!!

महातम मिश्रा
05 दिसम्बर 2017

आँगन में खेल रहे बच्चे , सुंदर चिंतन आदरणीया , सुंदर बाल रचना, वाह वाह

रेणु
08 दिसम्बर 2017

आदरणीय मिश्रा जी -- आभारी हूँ आपकी

बच्चों पर और बच्चों के लिए लिखना सबसे मुश्किल कार्य है।
आपने बहुत सुंदर लिखा।

रेणु
30 नवम्बर 2017

सस्नेह आभार नृपेन्द्र

शिशिर मधुकर
28 नवम्बर 2017

सुन्दर रचना ......

रेणु
29 नवम्बर 2017

आदरनीय शिशिर जी - सादर आभार |

ज़िआउल हुसैन
26 नवम्बर 2017

शानदार जबरदस्त जिंदाबाद

रेणु
26 नवम्बर 2017

जियाउल जी -- आपकी आभारी हूँ इन उत्साहवर्धक शब्दों के लिए ------

अलोक सिन्हा
17 नवम्बर 2017

अच्छी रचना है | अंतिम चरण तो बहुत ही अच्छा है |

रेणु
17 नवम्बर 2017

आदरणीय आलोक जी -------- हार्दिक नमन और आभार आपको

अति सुन्दर आदरणीया रेणु जी,...हृदय को भाती, कोमल,निश्छल रचना|

रेणु
16 नवम्बर 2017

प्रिय मनोज ----- आपके शब्द अनमोल हैं मेरे लिए ---------

बालमन को समझना और उस पर नैसर्गिक भावप्रवणता को जीवंत कर देना आदरणीया रेणु जी क़लम बख़ूबी जानती है .
आपकी यह बाल कविता कल 12-11-2017 को पांच लिंकों का आनंद में आपके ब्लॉग " क्षितिज " renuskshitij.blogspot.com/) से लिंक की गयी है. चर्चा हेतु अवश्य आइयेगा . सधन्यवाद .

रेणु
16 नवम्बर 2017

आदरणीय रविन्द्र जी --------इस मंच पर आप जैसे गुणीजनों की बदौलत मेरी रचनात्मकता को नए आयाम मिले हैं ----------- हार्दिक आभारी हूँ आपकी |

बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति .बधाई रेनू जी

रेणु
16 नवम्बर 2017

आदरणीय शालिनी जी ---------- बहुत आभारी हूँ आपके प्रेरक शब्दों के लिए ---------

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