सुनो जोगी !------- कविता -

17 नवम्बर 2017   |  रेणु   (130 बार पढ़ा जा चुका है)

सुनो  जोगी !-------    कविता -

ये तुमने कैसा गीत सुनाया जोगी -

जिसे सुनकर जी भर आया जोगी ,

ये दर्द था कोई दुनिया का –

या दुःख अपना गाया जोगी !


अनायास उमड़ा आखों में पानी -

कह रहा कुछ अलग कहानी ,

तन की है -ना धन की कोई -

कहीं है - गहरी चोट रूहानी ;

माथे की सिलवट कहती है --

कहीं नीद - न चैन पाया जोगी !!


किस आसक्ति ने बना दिया तुम्हे -

जग भर से विरक्त जोगी ?

कौन संसार बसा तुम्हारे भीतर -

तुम जिसमें हुए मस्त जोगी ?

किस दुःख पहना भगवा चोला -

क्यों कोई और रंग ना भाया जोगी ?


किसकी यादों के हवन में नित –

तन और प्राण जलाते हो ?

किस बिछुड़े की पीड़ा में –

यूँ दर्द के सुर में गाते हो ?

क्यों लरजे सुर सारंगी के ?

स्वर तुम्हारा भी कंपकपाया जोगी !!


क्या भारी भूल हुई तुमसे -

जो ये दारुण कष्ट उठाया है ,

ये दोष है कोई नियति का –

या अपनों से धोखा खाया है ?

क्यों तोड़े स्नेह – ममता के रिश्ते -

छोडी सब जग की माया जोगी !!


क्यों चले अकेले जीवनपथ पर ?

साथ लिया ना कोई हठ कर ?

तोडी हर बाधा रस्ते की -

ना देखा पीछे कभी भी मुड़कर ;

बिसरी गाँव-गली की सुध- बुध

हुआ अपना देश पराया जोगी !!


बुल्लेशाह की तू कहे काफियां -

गाये वारिस शाह की हीर जोगी ,

वो दिल का ही था किस्सा कोई -

जो राँझा बना फकीर जोगी ;

इश्क के रस्ते खुदा तक पंहुचे -

क्या तूने वो पथ अपनाया जोगी ?

ये कोई दर्द था दुनिया का -

या दुःख अपना गाया जोगी !!!!!!!!!!!!!!

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महातम मिश्रा
05 दिसम्बर 2017

ये तुमने कैसा गीत सुनाया जोगी -जिसे सुनकर जी भर आया जोगी , बहुत ही सार्थक भावप्रस्फुटित उद्भार आदरणीया वाह वाह
और वाह, जोगी जी वाह

रेणु
08 दिसम्बर 2017

आदरणीय मिश्रा जी सादर आभार और नमन आपको --

वो किस्सा ही था दिल का जो राँझा बना,,,, बहुत सुंदर रचना दी।

रेणु
30 नवम्बर 2017

प्रिय नृपेन्द्र बहुत आभारी हूँ आपकी |

ज़िआउल हुसैन
26 नवम्बर 2017

क्या कहना रेणू

रेणु
26 नवम्बर 2017

सादर सस्नेह आभार आपका जियाउल जी |

इंजी. बैरवा
21 नवम्बर 2017

क्यों तोड़े स्नेह – ममता के रिश्ते....
रेणुजी, बहुत ही सार्थक भावार्थ .

रेणु
24 नवम्बर 2017

सादर आभार आदरणीय बैरवा जी --

भावनात्मक अभिव्यकि्त

रेणु
21 नवम्बर 2017

सादर आभार शालिनी जी ------

अलोक सिन्हा
18 नवम्बर 2017

बहुत अच्छी रचना है|बहुत ही सार्थक व सफल प्रयास है |

रेणु
19 नवम्बर 2017

आदरणीय आलोक जी ------- बहुत प्रेरक हैं आपके सराहना भरे शब्द !!!!!!!!!!!!!!

Satish Agnihotri
17 नवम्बर 2017

बहुत खूब।

रेणु
24 नवम्बर 2017

आदरणीय सतीश जी ------- सादर आभार |

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