हाफिज तेरे पाकिस्तान की खैर नहीं

25 नवम्बर 2017   |  शालिनी कौशिक एडवोकेट   (217 बार पढ़ा जा चुका है)

 हाफिज तेरे पाकिस्तान की खैर नहीं

२००८ के मुंबई हमलों की नौवीं बरसी आ गयी है और अभी तक इसके मास्टर माइंड सजा से बहुत दूर हैं दुःख होता है जब भी अपने शहीदों को याद करते हैं और सबसे ज्यादा दुःख तब होता है जब हमारे कर्मठ व् युवा अधिकारियों के असमय काल का ग्रास बन जाने के जिम्मेदार लोगों के सिर पर कोई रहम का हाथ रखता है और यह रहम का हाथ किसी और का न होकर अपने ही भाई का, जिगर के टुकड़े पाकिस्तान का हो तब खून में उबाल आ जाता है और पाकिस्तान ने एक बार फिर हमारे खून को उबाल दिया है मुंबई हमले के मास्टर माइंड हाफिज सईद को नज़रबंदी से रिहा करके।

मुंबई में बुधवार, 26 नवम्बर 2008 को देर रात मशहूर होटलों के समीप तथा कई अन्य प्रमुख जगहों पर कुछ समय के अंतराल में हुए दर्जन भर शृंखलाबद्ध विस्फोट और गोलीबारी हुई, जिसमें 237 लोगों की मौत हो गई थी जबकि लगभग 300 लोग घायल हो गए थे। पुलिस के अनुसार केवल मुंबई के छत्रपति शिवाजी टर्मिनस स्टेशन पर गोलीबारी में ही 10 लोगों की मौत हो गई थी । छत्रपति शिवाजी टर्मिनस स्टेशन के अतिरिक्त ताज होटल, होटल ओबेरॉय, लियोपोल्ड कैफ़े, कामा अस्पताल तथा दक्षिण मुंबई के अन्य अनेक स्थानों पर हमले की सूचना थी। ताज होटल मे दो चरमपंथियों ने 25 लोगो को बंधक बना लिया, जिनमे 7 विदेशी शामिल थे, होटल ओबेरॉय मे गोलीबारी जारी थी और 40 लोग बंधक थे। ताज होटल के हेरीटेज विंग में आग लगी, जिसे फायर ब्रिगेड ने बुझा दिया। इस आतंकवादी हमले की ज़िम्मेदारी दकन मुजाहिदीन नामक एक नए आतंकवादी संगठन ने ली थी | एक समाचार संस्था से संवाद करते हुए लश्कर ए तोयबा के आतंकी मुख्या ने इस घटना का श्रेय लिया था। आधी रात के बाद भी कम से कम चार जगहों पर मुठभेड़ चल रही थी।

तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री शिवराज पाटिल के अनुसार पुलिस ने दो चरमपंथियों को मार गिराया और दो अन्य लोगों को गिरफ़्तार किया गया लेकिन अभी यह पता नहीं चल सका था कि गिरफ़्तार हुए लोग चरमपंथी थे या कोई और। केंद्र की ओर से दो सौ एनएसजी कमांडो और सेना के 50 कमांडो को मुंबई भेजा गया। इसके अलावा सेना की पाँच टुकड़ियों को वहाँ भेजा गया और नौसेना को सतर्क रहने को कहा गया। पुलिस अधिकारियों ने विलेपार्ले में एक टैक्सी में बम विस्फोट होने की पुष्टि की। सूत्रों की मानें तो शहर के अलग-अलग स्थानों पर आतंकवादियों के १६ गुट मौजूद थे और संयुक्त रूप से वारदात को अंजाम दे रहे हैं।

मुम्बई जनरल रेलवे के तत्कालीन पुलिस आयुक्त एके शर्मा ने बताया एके ४७ राइफल और ग्रेनेड से लैस कुछ आतंकवादी भीड़भाड़ वाले छात्रपति शिवाजी टर्मिनस (सीएसटी) रेलवे स्टेशन के यात्री हाल में प्रवेश कर गए और उन्होंने गोलीबारी शुरू कर दी और हथगोले फेंके। इसमें तीन लोगों की मौत हो गई। उन्होंने कहा सीएसटी में हुई घटना में एक पुलिसकर्मी समेत १० लोग घायल हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ संदिग्ध आतंकवादी आरक्षण काउंटर के बाहर से सीएसटी में प्रवेश कर गए और उन्होंने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। इसके बाद आतंकवादी होटल ताज, होटल ओबेराय और नरीमन हाउस में छुपकर लगातार विस्फोट और गोलीबारी कर रहे थे ।

इन आतंकवादी हमलों से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने २०० एनएसजी कमांडो, सेना के ५० कमांडो और सेना की पाँच टुकड़ियाँ भेजी थी । तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री शिवराज पाटिल ने देर रात दिल्ली में पत्रकारों से हुई चर्चा में बताया कि सेना और नौसेना को तैयार रहने को कहा गया था । २६ नवम्बर की रात होटल ताज में छुपे हुए आतंकवादियों से मुठभेड़ प्रारंभ हुई। २७ नवम्बर की सुबह होटल ओबेरॉय तथा २८ नवम्बर की सुबह राष्ट्रीय सुरक्षाबल के कमांडो नरीमन हाउस में आतंकवादियों का सामना करने पहुँच चुके थे। सबसे पहले होटल ओबेरॉय का आपरेशन २८ नवम्बर की दोपहर को समाप्त हुआ, शाम तक नरीमन हाउस के आतंकवादी मारे गए थे लेकिन होटल ताज के आपरेशन को अंत तक पहुँचाने में २९ की सुबह तक का समय लगा। २६ नवम्बर की रात होटल ताज में छुपे हुए आतंकवादियों से मुठभेड़ प्रारंभ हुई।

२७ नवम्बर की सुबह होटल ओबेरॉय तथा २८ नवम्बर की सुबह राष्ट्रीय सुरक्षाबल के कमांडो नरीमन हाउस में आतंकवादियों का सामना करने पहुँच चुके थे। सबसे पहले होटल ओबेरॉय का आपरेशन २८ नवम्बर की दोपहर को समाप्त हुआ, शाम तक नरीमन हाउस के आतंकवादी मारे गए थे लेकिन होटल ताज के आपरेशन को अंत तक पहुँचाने में २९ की सुबह तक का समय लगा। शनिवार सुबह से कमांडो कार्रवाई ख़ासी तेज़ आई और कई धमाकों की आवाज़ें सुनी गईं। भीषण गोलीबारी भी हुई। इमारत के चारो ओर विशेष तौर पर ग्राउंड फ़्लोर के आसपास काला धुँआ फैल गया और चारों और कमांडो नज़र आने लगे। होटल में भीषण धमाके और गोलीबारी हुई।

सुरक्षाकर्मियों ने वहाँ मौजूद सभी पत्रकारों को आदेश दिया - "लेट जाओ...लेट जाओ..." लेकिन कुछ मिनट बाद घटनास्थल शांत हो गया। धमाकों और और गोलीबारी के बाद टीवी चैनलों ने एक शव को इमारत से बाहर फेंके जाते दिखाया। बाद में पुष्टि की गई कि यह शव एक आतंकवादी का था। ५८ घंटे बाद शनिवार सुबह ताज होटल में चल रही सुरक्षा बलों की कार्रवाई ख़त्म हो गई। इसमें तीन आतंकवादी और राष्ट्रीय सुरक्षा बल के एक मेजर मारे गए। इस गोलीबारी में पुलिस तथा आतंकविरोधी दस्ते के कुल मिलाकर ११ लोगों की मृत्यु हुई जिसमें अनेक अधिकारी थे आतंकविरोधी दस्ते के प्रमुख हेमंत करकरे, मुठभेड़ विशेषज्ञ उप निरीक्षक विजय साळस्कर अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अशोक कामटे अतिरिक्त पुलिस आयुक्त सदानंद दातेतथा राष्ट्रीय सुरक्षा बल के मेजर कमांडो संदीप उन्नीकृष्णन, निरीक्षक सुशांत शिंदे, सहायक उप निरीक्षक-नानासाहब भोंसले, सहायक उप निरीक्षक-तुकाराम ओंबले, उप निरीक्षक- प्रकाश मोरे, उप निरीक्षक-दुदगुड़े, कांस्टेबल-विजय खांडेकर, जयवंत पाटिल, योगेश पाटिल, अंबादोस पवार तथा एम.सी. चौधरी के शहीद होने के समाचार थे।

मुंबई हमले में अगर कसाब ज़िंदा गिरफ्तार न किया गया होता तो हाफिज सईद इस हमले की पूरी जिम्मेदारी दक्कन मुजाहिदीन के माथे मढ़ने वाला था लेकिन उसकी बदकिस्मती रही कि कसाब ज़िंदा पकड़ा गया और उसका खेल बिगड़ गया लेकिन पूरा खेल तब बिगड़ेगा जब इस दुनिया में पाकिस्तान जैसा आतंक का रहनुमा नहीं रहेगा और अब सम्पूर्ण विश्व ने पाकिस्तान की असलियत को पहचान उसका यह रूप बिगाड़ने की कसम खा ली है और अमेरिका ने भी पाकिस्तान से हाफिज सईद को सजा देने को कहा है।


शालिनी कौशिक

[कौशल ]

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