पराधीनता -------- आचार्य अर्जुन तिवारी

04 दिसम्बर 2017   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (107 बार पढ़ा जा चुका है)

सनातन काल से ही मनुष्य ने स्वतंत्र ही रहना चाहा है | पराधीनता को अभिशाप मानते हुए बाबा जी मानस में लिखते हैं------- "पराधीन सपनेहुं सुख नाहीं" अर्थात---- परधीन रहकर सुख की अभिलाषा करना मूर्खता मात्र है |आज संसार में कोई भी सुखी नहीं है | कहने को तो हम सभी स्वतंत्र हैं पर वास्तव में हम सभी गुलाम ही हैं , अपनी इन्द्रियों के गुलाम | इन्द्रियां मन को बार - बार अपने विषय की ओर खींचती हैं | प्रत्येक इन्द्रिय का प्रवाह वायु के प्रवाह से भी कई गुना तेज होता है !इन विषयों के प्रकृतिरूपी प्रवाह से मन एक क्षण में एक ओर तो दूसरे क्षण में दूसरी ओर आकर्षित होता है |इन्द्रियों के विभिन्न विषयों में इस प्रकार खिंचा हुआ मन कभी एक जगह स्थिर न रहकरके सदैव चंचल ही बना रहता है!यही मन की पराधीनता है !पराधीन होना ही सभी दुखों का कारण है! जो इन्द्रियों के वश में होकर विषयों के पीछे पड़ा हुआ है वह पराधीन ही है!पराधीनता का अर्थ है -- दूसरे के वश में होना या गुलाम होना | जो व्यक्ति ज्ञान रहित होता है और जो अपने मन को योग के द्वारा शांत नहीं करत,उसकी इन्द्रियां उसके वश में नहीं रहतीं!उस व्यक्ति की दशा बलवान घोड़ों वाले रथ पर बैठे नये रथवान जैसी भयानक होती है ! किंतु जिसने अपने मन को वश में किया है उसे परमसुख प्राप्त होता है!वह उस पद को प्राप्त कर लेता है जहाँ से पुन: गिरना नहीं पड़ता|वह जन्म-मृत्यु के पार हो जाता है|जिसके इन्द्रियरूपी घोड़ों की मनरूपी लगाम अपने वश में है वही रास्ता पार कर सकता हौ परमपद को प्राप्त कर सकता है|परंतु पराधीन मनुष्यों को सदैव दुखी ही रहना पड़ता है |अत: प्रत्येक मनुष्य को सदैव अपने मन को वश में रखना चाहिए|जिसकी इन्द्रियां विषयों से हर प्रकार से निवृत्त रहती हैं उसकी बुद्धि स्थिर-शान्त एवं गम्भीर रहती है,उसे ही सब सुख प्राप्त होते हैं|इन्द्रियों को स्वच्छन्द कर देने पर अपनी शक्ति क्षीण हो जाती है,और इसी निर्बलता के कारण मनुष्य दुखी होता है !जो व्यक्ति अपनी इन्द्रियों को संयम में रखता है,उन्हें विषयों के जंगल में नहीं भटकने देता उसकी शक्ति उसके भीतर सुरक्षित रहती है!अपनी इसी शक्ति के बल पर वह परम सुख को प्राप्त कर लेता है!अपने भीतर शक्ति की अधिकता ही सुख है | यदि सुख भोगने की इच्छा है तो मन,बुद्धि और इन्द्रियों को अपना दास बनाओ!उनके अधीन रहकर अपना अमूल्य जीवन मत नष्ट करो !!!!!!!!!!!!

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