माँ

17 दिसम्बर 2017   |  दीपिका तिवारी   (46 बार पढ़ा जा चुका है)

जब हो मन उदास,

जवाबों की हो तलाश,

बिन पूछे ही प्रश्नो के

उत्तर दे जाती है माँ |

न जाने कैसे सब ,

जान जाती है माँ ?

मेरी हर परेशानी,

आँखों से ही जान जाती,

बस यही एक प्रश्न

बेजवाब छोड़ जाती है माँ ,

कि क्यों सब कुछ

पहचान जाती है माँ?

भावनाओं पर हो प्रहार,

या हो जाये मन की हार,

दिल के आईने में बस

सिर्फ एक दिखती है माँ|

माँ तो माँ है, तभी तो

याद आ ही जाती है माँ |

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