बदलने होंगे गुलामी के समय के प्रशासन, शिक्षा और राजनैतिक सिस्टम

14 जनवरी 2018   |  अजीत सिंहः   (38 बार पढ़ा जा चुका है)

बदलने होंगे गुलामी के समय के प्रशासन, शिक्षा और राजनैतिक सिस्टम
एक आजाद देश को अपना सिस्टम बनाना चाहिए था, लेकिन हमने अपने पुराने सिस्टम में बस बहुत थोड़ा सा बदलाव कर लिया। इसी वजह से कई मायनों में हमने खुद को पंगु बना लिया है।

जो लोग हम पर बाहर से शासन करना चाहते थे, उन्होंने कुछ खास तरह का तंत्र व सिस्टम तैयार किया, क्योंकि वे हम पर अपना वर्चस्व बनाए रखना चाहते थे।

उसकी गाड़ी में बहुत सारे सामान होते हैं – एक हैंड गन से लेकर हथकड़ी तक सब चीजें होती हैं। वह सारे साजो-सामान से युक्त एक पुलिसवाले की तरह आता है, लेकिन वास्तव में वह एक इंजीनियर होता है।

एक आजाद देश को अपना सिस्टम बनाना चाहिए था, लेकिन हमने अपने पुराने सिस्टम में बस बहुत थोड़ा सा बदलाव कर लिया। यहां तक कि आज भी इस देश में अगर किसी बच्चे या बड़े की तरफ अचानक कोई पुलिस वाला बढ़ता है तो वे एकदम से डर जाते हैं। अगर कोई पुलिस वाला आए तो आपको तो आश्वस्त होना चाहिए, ‘ओह, यहां तो पुलिसवाला है, अब डरने की कोई बात नहीं।’ अगर पुलिस न हो तो आपको डरना चाहिए। लेकिन अधिकतर लोग आज भी पुलिस को आता देख डर जाते हैं। यह किसी और समय की बात है, जब किसी पुलिस वाले के आने का मतलब होता था कोई आपके साथ कुछ बुरा करने वाला है। अब होना यह चाहिए कि अगर पुलिसवाला आ रहा है तो इसका मतलब है कोई आपकी सुरक्षा के लिए आ रहा है।

गुलामी के दौर की चीज़ों को बदलना होगा

लेकिन अभी भी हम इस सोच को नहीं अपना पाए हैं। यह चीज आज भी हमारी मानसिकता में नहीं आती, क्योंकि गुलामी के दौर में हमने जिस सिस्टम का पालन किया, लगभग उन्हीं नियमों व तंत्र का हम अभी भी पालन कर रहे हैं। भले ही इनमें थोड़े बहुत बदलाव हुए हों, लेकिन जो बुनियादी बदलाव होने चाहिए थे, वे नहीं हुए- जैसे हमारा पुलिस बल कैसा होना चाहिए, हमारा प्रशासनिक बल कैसा होना चाहिए, हमारी राजनैतिक प्रणाली कैसे काम करनी चाहिए, जिन चीजों पर हमें जितना ध्यान देना चाहिए, वैसा ध्यान हमने नहीं दिया। अगर आपको पता ही नहीं होगा कि आपको कैसे सिस्टम की जरूरत है, आप कैसी गतिविधि संचालित करना चाहते हैं, और अगर आप गलत सिस्टम लागू कर देंगे तो आपकी गतिविधि अपंग होकर रह जाएगी। तो अगर आप गुलामी के दौर के सिस्टम को वैसे का वैसा अपनाते हैं, तो इसके पीछे कारण यह है कि ऐसा करना आपके लिए आसान है। चूंकि इसमें पहले से सारी चीजें तय होती हैं, इसलिए हम उन्हें जस का तस उठा लेते हैं। इसी वजह से कई मायनों में हमने खुद को पंगु बना लिया है।

आजादी के सत्तर सालों बाद भी हमारी आबादी का एक बड़ा हिस्सा आज भी गरीबी के बेहद निचले स्तर पर है। हमारे पोषण का स्तर सबसे कम है। हम लोग बड़ी आबादी को पैदा करने में व्यस्त हैं। यह आबादी शरीर व दिमाग दोनों में ही कमतर है, इसकी वजह बस इतनी है कि कम उम्र में जो बुनियादी व जरूरी पोषण उन्हें मिलना चाहिए, वह उन्हें नहीं मिलता। अब सवाल है कि ये सिस्टम देश की प्रगति के लिए बना है या उसके पतन के लिए।
-सद्गुरू जग्गी वासुदेव जी
#अजीतसिंहः

अगला लेख: हमारे भोजन पर नियंत्रण के प्रयास -थेरेसा क्रिनीनगर



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x