ख्वाहिशें

15 जनवरी 2018   |  Tejaswita Khidake   (72 बार पढ़ा जा चुका है)


ज़िन्दगी का क्या, ज़िंदगीभर साथ नहीं देती,
ख्वाहिशों का क्या, ख़त्म भी तो नहीं होती,
जख्म हो तो मरहम भी मिल जाता है;
दवा की जरुरत किसे है दुवा हो बस जो ख़त्म नहीं होती।

Tejaswita Khidake: ख्वाहिश

https://tejaswitak.blogspot.in/2018/01/blog-post_40.html

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