"दोहा"

30 जनवरी 2018   |  महातम मिश्रा   (82 बार पढ़ा जा चुका है)

"दोहा"


उड़े तिरंगा शान से लहराए जस फूल

हरित केशरी चक्र बिच शुभ्र रंग अनुकूल।।-१


झंडा डंडे से बँधा मानवता की डोर

काश्मीर जिसकी सिखा क न्याकुमारी छोर।।-२


महातम मिश्र गौतम गोरखपुरी

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30 जनवरी 2018
“मानव छंद”रे माँ तेरे चरणों में सगरो तीरथ सुरधामा करुणाकारी आँचल में मोहक ममता अभिरामा॥ सुख की सरिता लहराती तेरे नैनों की धारादुख के बादल दूर रहें पानी चाहे हो खारा॥ पीकर उसको जी लेता तेरा लाल निराला है अमृत बूंदे मिल जाती सम्यक स्वाद निवाला है॥ खाकर मीठी थपकी को म
30 जनवरी 2018
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