“गज़ल” रात कारी घटा चाँद ने देखिए॥

05 फरवरी 2018   |  महातम मिश्रा   (68 बार पढ़ा जा चुका है)

“गज़ल”


आइना पास है सामने देखिए

सूरतों की कसक मायने देखिए

आप भी बेवजह दाग धोने चलीं

नूर नैना नजर दाहिने देखिए॥


उठ रहें हैं धुआँ किस गली आग है

हद हवा उड़ चली भाप ने देखिए॥


घिर गई रोशनी धुंध की आड़ में

यह पुराना महल छाप ने देखिए॥


राख़ चिंगारियाँ दिल जलाती नहीं

हाल कंपन अधर ताप ने देखिए॥


कुछ दवा भी नहीं नाम इस दर्द का

हो सके तो पुनः आप ने देखिए॥


गैर गौतम गरज पर सुहाते सभी

रात कारी घटा चाँद ने देखिए॥


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

अगला लेख: चौपाई



कवि भाव प्रेमी है जो रचना में यदा कदा निकल ही जाता है, हार्दिक धन्यवाद बहना

रेणु
06 फरवरी 2018

बहुत खूब - बड़े भैया !!!!!!!!!
आइना पास है सामने देखिए
सूरतों की कसक मायने देखिए--- सरस और सुंदर रचना | ------ सादर ---

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