भारतीय भाषाओं में इन्टरनेट से बदलता हुआ देसी प्रारूप और युवा

14 फरवरी 2018   |  अमित भूषण   (60 बार पढ़ा जा चुका है)

इन्टरनेट कि सेवाओं की भारतीय भाषाओं में उपलब्धता बढने से इसके देश के उन लोगों तक पहुचने में काफी मदद मिलेगी जिन्हें अबतक इसके लाभ से वंचित रखा गया । इससे कई उन लोगों को भी रोजगार मिलेगा जो कि भारतीय भाषाओं में अपने काम को सरलता से कर सकते हैं । इन्टरनेट के भारतीय भाषाओं में उपलब्धता बढ़ाने के लिए अभी कई और कदम लेने की जरूरत है । सरकार ने बैंकिंग, इन्सुरंसे, टैक्स, विभिन्न सरकारी लाइसेंस, कानूनी सेवाए इत्यादी को अभी भारतीय भाषाओं में सरलीकरण करने कि दिशा में कदम बढ़ाने हैं । इनकी गैर मोजुदगी अभी व्यापारी वर्ग को भारतीय भाषा में काम करने में बाधक है । इस कारण सिर्फ एक या दो सेवाएँ जैसे की सोशल मीडिया में अपनी बात रखने से एक छोटे प्रारूप में ये कवेल शूरुआत भर है । लेकिन तुलना के तौर पर इसे भारतीयों द्वारा इंग्लिश भाषा में इन्टरनेट के इस्तमाल से मुकाबले के तौर पर देखने वालों की कोई कमीं नहीं है । कई लोगों को भारतीय भाषाओं में इन्टरनेट की महत्ता पर शक है तथा उन्हें ये महत्वकंशी एवं गैर जरूरी लगती है । कई लोग भारत को विदेशों को सर्विसेज मुहैया कराने में इसे एक रोर्डे की तरह भी देखते है क्योंकि इससे भारतीय तकनीशियन का ध्यान इन सेवाओ की तरफ जायेगा जिससे इन तकनीशियन कि उपलब्धता में कमी भी आ सकती है तथा इनकी सेवाएँ महंगी हों सकती हैं । जरूरत है कि इन तकनीशियन को बढाया जाये ताकी न केवल भारत अपितु अन्य देशों को भी अपनी भाषओं में इन्टरनेट को उपलब्ध करान्ने में सहूलियत हो । इससे भारतीय टेक्नीशियनो की योग्यता को अन्य देशों में भी बढ़ावा मिलेगा तथा उन देशों को अपनी सेवा उद्योग को बढ़ाने में सहायता होगी । कई और लोगों को इन सेवाओं को प्राप्त करने में सहुलियत होगी एवं आगे बढ़ने में मदद होगी । उधाहरण के तौर पर एक गूगल कि जगह इसी देश में २०-३० गूगल मतलब की हर भाषा के लिए एक, और दुनिया के अन्य देशों के लिए गूगल कि तरह अन्य साधन और यह सब ज्यादातर मोबाइल पर जोकि लोगों का प्रथम इन्टरनेट माध्यम होगा । यह हो सकता है कि गूगल या इस तरह कि कोई और कंपनी इन में से कई भाषओं को सेवाएँ प्रदान करने में सछम हो या जल्द हो जाये पर उससे भी इन तकनीशियन को फायदा ही होगा । ये हो सकता है कि ये देश तकनीशियन को उतना मुआवजा ना दें पाये जितना कि विकसित देश पर ये कई लोओ को काम दे सकने की छमता रखते हैं इसमें कोई संधेह नहीं । और चुकीं ये अभी विकास कि शोरुआत करेंगे इस लिए जो टेक्निकल छमता चाहिए वह ज्य्यादा कमाने वाले तकनीशियन से कम होगी । लेकिन ये देश इस तरह का विकास करें इसके लिए ये जरूरी है की भारत में इस तरह कि पहल हो और ये समग्र तौर पर हो तथा इससे कई लोग जुड़ें और लाभांवित हो । अभी इस तरह की पहल सरकार की तरफ से नहीं हुई है लेकिन इसे बढ़ाने कि जरूरत है और समाज को भी जागरूक होना होगा।

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बहुत सही

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