मूर्ख हिन्दुओं की मसीहा सरकार.....

20 फरवरी 2018   |  अजीत सिंहः   (48 बार पढ़ा जा चुका है)

सरकार ने कोर्ट में कहा- ताजमहल नहीं है शिवालय, शाहजंहा ने मुमताज की याद में बनवाया
आगरा। कार्यालय संवाददाताUpdated: Tue, 20 Feb 2018 12:18
ताज या तेजोमहालय मामले में सोमवार को भारत सरकार व पुरातत्व विभाग ने अपना जवाब कोर्ट में दाखिल कर दिया है। इसमें पुन: एक बार कहा है कि ताजमहल शिवालय नहीं है। ऐसा कोई साक्ष्य भी नहीं है। अपर सिविल जज सीनियर डिवीजन अभिषेक सिन्हा ने सुनवाई के लिए 26 फरवरी नियत की है। 

लखनऊ के अधिवक्ता हरीशंकर जैन समेत अन्य अधिवक्ताओं ने वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश कुलश्रेष्ठ के माध्यम से आठ अप्रैल 2015 को अदालत में परिवाद दाखिल किया था। इसमें भारत सरकार, गृह मंत्रालय, पुरातत्व विभाग और केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय को प्रतिवादी बनाया गया है। उन्होंने दावा में कहा है कि ताजमहल पूर्व में तेजोमहालय मंदिर के नाम से था। यहां लार्ड शिव का भव्य मंदिर था। जिसका नाम तेजोमहालय था। भारत सरकार और पुरातत्व विभाग ने प्रतिवाद पत्र दाखिल कर दिया है। तीन बार से जवाब दाखिल को समय मांग रहे भारत सरकार व पुरातत्व विभाग के अधिवक्ता विवेक शर्मा व अंजना शर्मा ने सोमवार को जवाब दाखिल किया। इसमें कहा कि ताजमहल परिसर में फोटोग्राफी  की इजाजत नहीं है। यह कानूनन अवैध है। परिसर के बंद हिस्सों में नहीं जा सकते हैं। वादीपक्ष द्वारा जो भी बंद हिस्सों में फूलपत्ती, कलश आदि की उपस्थिति का जो अर्थ लगाया है वह काल्पनिक है। इसका कोई साक्ष्य, दस्तावेज दाखिल नहीं किया गया है। शिवालय से संबंधित को साक्ष्य नहीं दिया गया है। मामले से जुड़े दस्तावेज सरकार पहले की दाखिल कर चुकी है। वहीं वादीपक्ष की ओर से अधिवक्ता राजेश कुलश्रेष्ठ ने आपत्ति जताई। अदालत ने मामले की सुनवाई के लिए 26 फरवरी नियत की है।
मुमताज की याद में बनवाया था ताजमहल
जवाब में यह भी कहा कि बदशाह शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज की याद में ताजमहल बनवाया था। इस संबंध में कई शासनादेश व कई नजीर भी हैं। ताजमहल संरक्षित स्मारक जो कि भारत सरकार की संपत्ति है। जबकि पूर्व में पुरातत्व विभाग के डीजी ने ताजमहल को लेकर जरूरी दिशा-निर्देश जारी कर चुके हैं। इसके कारण फोटोग्राफी इन हिस्सों में प्रतिबंधित है। छह जनवरी 2014 का आदेश है कि ताजमहल की गुम्बद व भूतल आदि संरक्षित क्षेत्र में किसी को जाने की अनुमति नहीं है। 

वीडियोग्राफी की नहीं है इजाजत 
वादी की ओर से 25 अक्तूबर को प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर कहा कि एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किया जाए, तेजोमहालय की सभी हिस्सों (सात मंजिल) की फोटो व वीडियोग्राफी कराए जाने का आग्रह किया था। हालांकि भारत सरकार व पुरातत्व विभाग के जवाब में इसका विरोध करते हुए कहा कि इसकी किसी को इजाजत नहीं है। 
जो सरकार जनता की संकाओं को दूर करने के लिए शिवमन्दिर (ताजमहल) की फोटोग्राफी/वीडियोग्राफी तक नहीं करा सकती मूर्ख हिन्दू उससे राम मन्दिर बनवाने की सोचे बैठे हैं।

#कायरहिन्दू

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