“बुरा न मानों होली में”

01 मार्च 2018   |  महातम मिश्रा   (85 बार पढ़ा जा चुका है)

होली जोगिरा गीत ......


“बुरा न मानों होली में”


उडी हवा हैं रंग भंग की छानो मेरे यार

भौजी झाँके घर के बाहर पका रही अंचार...... जोगिरा सर र र र र र -1


कैसी कुर्ती कैसी टोपी कैसी री सलवार

भीग रही है गोरी दैया बिना रंग बौंछार.......... जोगिरा सर र र र र र-2


सम्हल के चलना नेता जी है फागुनी बयार

पानी से बाहर निकले हैं बड़े बड़े घरीयार........ जोगिरा सर र र र र र-3


गाँव गाँव में शोर मचा है माटी में ब्यापार

लाल खड़े हो परधानी में जीत रही सरकार....... जोगिरा सर र र र र र-4


गई भैंस पानी में भैया पोखर हुआ बेहाल

नौ मन की जलकुम्ही फैली दे ताल पर ताल...... जोगिरा सर र र र र र-5


बह न पाये किसी की नाली दे गाली गँवार

राह बिचारी जोह रही है कैसा है भरतार........जोगिरा सर र र र र र- 6


बात बात पर लड़ जाती हैं सकरी गली दीवार अंगुल अंगुल माप लिए हो अब कैसी मल्हार........ जोगिरा सर र र र र र-7 डर मत यारा पीकर लुढ़का देशी शुद्ध शरा

ब वासी हो गई बोतल बैरन न कर नशा खराब......... जोगिरा सर र र र र र-8


आज हर्ष की बात हुई है होली में पिया साथ

मलमल रंग लगा ले सजना उठापटक की रात....... जोगिरा सर र र र र र-9


गाँव गाँव क्या शहर शहर क्या मीठी बोली ढ़ोल

चौतल्ली डेढ़तल्ली रसना मधुर मधुर स्वर घोल........जोगिरा सर र र र र र-10


धूल उड़ा ले चूल उड़ा ले छलके गागर मोर

रे गौतम हुड़दंग उड़ा ले पुरखों से कर ज़ोर.......... जोगिरा सर र र र र र-11


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

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याद है बहन गए वर्ष की होली, जैसे गाँव की पुरानी यादें उभर आयी, निशब्द हूँ, बस बहुत बहुत मंगल कामना के साथ शुभाशीष

रेणु
01 मार्च 2018

आदरणीय भैया आज तो लगता है सीधा गाँव ही पहुँच हए ओर रस्ते पर खड़े हो बौराए होली गीत गा रहे हैं | भैया वो होली का स्वर्णकाल काश ! आही जाता -- वो मीठे रसीले गीत , वो बेबाक साधिकार हंसी ठिठोली और गाँव- गली के मस्तानों का प्यारा सा हुडदंग !!!!! तोल की ताल के साथ वो मतवाले लोकगीत अब तो मन भर आता वो दृश्य जब स्मृतियों में उभरते हैं | नई पीढियां तो जान भी नहीं पायेगी कि चांदनी रातों में लोक रस में पगे रसीले गीतों का आनद !!!!!!!!! आपको रम्भा भाभी के साथ मेरी हार्दिक मंगल कामनाएं | घर आंगन में होली के रंग महकते और खिलते रहें | होली मुबारक भैया साथ ही पिछली होली की स्मृति को भावुक नमन जब मैंने आपको पहली बार अपनी शुभकामनाएं भेजी थी |

मस्त होली गीत गाँव की याद आ गई

हार्दिक धन्यवाद प्रिय नृपेंद्र जी , आप को होली की बहुत बहुत बधाई

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एक देशज गीत...... “रंग चढ़वा ल”रंग चढ़वा ल हो रंग चढ़वा लभौजी नथुनिया पे रंग चढ़वा ल.......सरसो फुलाइल चमैली फुलाइल फुलल रहरिया हो अंग मलवा ल......भौजी नथुनिया पे रंग चढ़वा ल साँझ सबेरे छमकि जाले पायल लहूरा देवरवा भइल बा रे घायलघूँघता उठा ल हो नथ नथवा ल..... भौजी नथुनिया पे रंग चढ़वा लकोर कोर चोली पसार नह
06 मार्च 2018
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