इस्लाम धर्म की पुनर्परिभाषा : आज के समय की माँग

03 मार्च 2018   |  नीरज अग्रहरि   (203 बार पढ़ा जा चुका है)



आज विश्व तेजी से बदल रहा है और साथ ही जनसँख्या भी तेज़ी से बढ़ रही है, भारत पर भी इसका असर पड़ रहा है | आज की नया पीढ़ी पुरानी रूढ़िवादी मान्यताओं को तेजी से खत्म कर एक नए समाज का निर्माण कर रही है | आज के उदारवादी माहौल मै कट्टरवादी विचारधारा को किसी भी हाल मै बर्दास्त नहीं किया जा सकता है | अभी कुछ दिन पहले मोह्हमद साहब के 41वी पीढ़ी एवं जॉर्डन के राष्ट्रपति का बयान इसी ओर इंगित करता है | वक़्त आ गया है की इस्लाम शब्द को पुनर्परिभषित कर इसको मुख्यधारा मे शामिल किया जाये न की कट्टरवाद से |

और सबसे बढ़कर इसके लिए इसी धर्म के नवयुवको को आगे आकर आह्वान करना होगा , तभी जाकर कुछ सकारात्मक परिणाम मिल सकेगा |

एक रिसर्च के अनुसार साल 2070 तक विश्व मे मुस्लिम आबादी प्रथम स्थान पर होगी एवं एक अन्य रिसर्च अमेरिकी थिंकटैंक के पिऊ के अनुसार साल 2050 तक केवल भारत ही विश्व मे मुस्लिम आबादी मे प्रथम स्थान पर होगा |

वक़्त आ गया है की इतनी बड़ी ऊर्जा को एक मार्ग , एक विचार , मार्गदर्शन किया जाये , क्यूंकि अगर इतनी बड़ी ऊर्जा कट्टरवादियों , आतंकवादियों के हाथ लग गईं तो अनर्थ हो जायेगा |

अंत मे मै इतना ही कहना चाहूंगा की वास्तव मे वक़्त आ गया है की इस्लाम + आतंकवाद को छोड़कर कुरान + कंप्यूटर का साथ अपनाया जाये |

जय हिन्द , जय भारत

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रवि कुमार
04 मार्च 2018

सच कहा

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