जातिगत आरक्षण

10 मार्च 2018   |  Mayank shukla   (374 बार पढ़ा जा चुका है)

सामान्य वर्ग की व्यथा पर कुछ पंक्तिया . मै भी सामान्य वर्ग का दलित हु साहब मुझे भी आरक्षण चाहिए..


1.मेरी माँ का सपना है बेटा सरकारी अफसर बने,पिता दिन-रात मेहनत करके उस सपने को बुने, मेरे मात-पिता के सपनो को यू ना जलाइये, मै भी सामान्य वर्ग का दलित हु साहब मुझे भी आरक्षण चाहिए..........


2.पिता ने कर्ज लेकर पढ़ाया मुझको, इस आस में की बेटा एक दिन सुत समेत चुका देगा इसको, एक पिता की मेहनत को इस कदर ना बहाइये , मै भी सामान्य वर्ग का दलित हु साहब मुझे भी आरक्षण चाहिए............


3.बहन की आस हु मै, पिता का विश्वास हु मै, मेरे माँ के सपनो का साकार रूप हु मै, इतनो की आस को यू ना डुबाइये, मै भी सामान्य वर्ग का दलित हु साहब मुझे भी आरक्षण चाहिए...........


4.जब बेटा डिग्री लेकर घर को जाता है, मात-पिता सिर गर्व से ऊंचा हो जाता है,रोजगार की तलाश में अब यू ना भटकइये, मै भी सामान्य वर्ग का दलित हु साहब मुझे भी आरक्षण चाहिये...


5.जब कभी भी घर जाता हूं मैं, मात-पिता के सपनो को उनकी आंखों में देखकर कई दफा मर जाता हूं मैं,अब मुझे अपनी नजरो में ही इतना मत गिराइये, मै भी सामान्य वर्ग का दलित हु साहब मुझे भी आरक्षण चाहिए..........


6.आओ इस व्यथा को दूर करे, जो मेरे भाई पिछड़े है उनको भी साथ लेकर चले, आरक्षण का आधार जातिगत से हटाइए, मै भी सामान्य वर्ग का दलित हु साहब मुझे भी आरक्षण चाहिये..........✍🏻मयंक शुक्ला✍🏻9713044668

अगला लेख: होली पर शानदार कविता



बहुत ज्वलंत सत्य उजागर किया भाई।
सच मे गरीबी जातिगत नही व्यक्तिगत तो आरक्षण त तो न हो , या फिर आर्थिक आधार पर हो।

Mayank shukla
18 मार्च 2018

आभार आपका

रवि कुमार
11 मार्च 2018

शानदार कविता ...

Mayank shukla
18 मार्च 2018

आभार आपका

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