माँ,,,,

20 मार्च 2018   |  नृपेंद्र कुमार शर्मा   (142 बार पढ़ा जा चुका है)

सागर से भी विशाल हृदय वह मां है,
मन मे ममतत्व का मान लिए वह मां है।

ईस्वर भी जिसका नमन करें वह मां है,
देवों के लिए भी वन्दनीय वह मां है।

मां के उपकारों से उऋण हो पाना न सम्भव है,
फिर भी जो जो कहे ये कर्तव्य मेरा वह माँ है।

मां की शक्ति से ही ये संसार चला है,
जो हर लेती हर बला संतान की वह मां है।

माता की करे हम बन्दना माता को दे सम्मान,
जग की हर मां को मेरा चरण लग प्रणाम।

अगला लेख: स्वप्न्न,,,,,



रवि कुमार
22 मार्च 2018

बहुत ज़बरदस्त , माँ से बढ़कर कोई नहीं हो सकता

रेणु
20 मार्च 2018

सन्देश भेजा था आपने देखा नहीं शायद ?

रेणु
20 मार्च 2018

प्रिय नृपेन्द्र -- मातृशक्ति की सुंदर अभ्यर्थना !!!!!! आपको नवरात्रों पर मेरी हार्दिक मंगल कामनाएं |

Mayank shukla
20 मार्च 2018

बहुत खूब लिखा आपने

अति सुन्दर आदरणीय नृपेंद्र जी |

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