चाँदनी रात मे आना तुम

22 मार्च 2018   |  Vikas Khandelwal   (140 बार पढ़ा जा चुका है)

आओ की फिर से तन्हा हु मैं



मेरी रूह चली गई है मेरे जिस्म को छोड़कर



चाँदनी रात मे आना तुम



मेरी परछाई ओढ़ कर



मुझको गमो ने मार ही डाला है



तुम लाना मेरे लिए कोई खुशी खोजकर



मैं इन तन्हा और अन्धेरे रास्तो पर पहले भी तो चलता था



कोई नहीं था अपना लेकिन जीवन तो फिर भी चलता था



आ भी जाओ अब मेरे जीवन मे तुम उजाला बनकर



हम इस डर से अब किसी का हाथ नहीं पकड़ते



कौन फिर से आँखों मे आँसू लेगा यार से बिछड़कर



आओ की फिर से तन्हा हु मै










अगला लेख: मैं नादान था मोहब्त कर बैठा



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
16 मार्च 2018
तु
रह ही लेंगे बिछड़ कर तुझसेतेरी याद तुझे मुबारक होकर ही लेंगे खुद को काबू सनमतेरी मुहब्बत तुझे मुबारक होसह ही लेंगे गमे जुदाई कातेरी तन्हाई तुझे मुबारक होतु लिखेगी क्या मुझको हरजाईतेरी कलम तुझे मुबारक होंRj Ali Hashmi
16 मार्च 2018
29 मार्च 2018
मै
कौन तेरी मासूम नज़रो से गिरना चाहता है मैं आँसू हू मुझे पलकों मे बन्द कर लो अगर अपना समझती हो मुझको ,तो ख़ुद के इतना क़रीब रख लो मैं धड़कन हू , मुझे दिल मे अपने बन्द कर लो प्यार का ये अफ़साना आ
29 मार्च 2018
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x