आंख से ऑपरेशन करके निकाले 'पत्ता गोभी वाले' कीड़े की सच्चाई ये है

27 मार्च 2018   |  रवि कुमार   (484 बार पढ़ा जा चुका है)

भाईसाब सवेरे सवेरे खोपड़िया भन्ना गई. जैसे ही व्हाट्सऐप खोला, गांव से एक भैया जी ने ये मैसेज भेजा. कहा कि इसकी सच्चाई पता करके बताओ. मैसेज में लिखा था “पत्ता गोभी वाला कीड़ा आपके शरीर के किसी भी अंग में दाखिल हो सकता है. पत्ता गोभी का बहिष्कार करो. किसानों से विनती है कि पत्ता गोभी उगाना बंद करें. बच्चे और परिवार तो आपका भी है. अमृतसर, पंजाब से.”

इसमें जो वीडियो लगा है वो पिछले दो तीन दिन से यूट्यूब पर भी इसी टाइटल के साथ शेयर हो रहा है. और खूब वायरल हो रहा है. वीडियो हम लगा दे रहे हैं. लेकिन कलेजा कड़ा करके देखना. इसमें हिंसा विंसा नहीं है लेकिन घिनापे से भरपूर है इसलिए सोच समझकर क्लिक करना. जहां से हिम्मत न पड़े देखने की, बंद कर देना. ये वीडियो वायरल भले अभी हो रहा हो लेकिन यूट्यूब वगैरह पर तीन-चार साल से पड़ा हुआ है. कभी इसकी लंबाई 8 सेंटीमीटर लिखी जाती है, कभी 13 सेंटीमीटर तो कभी 20 सेंटीमीटर. यानी इसकी लंबाई के बारे में भी विद्वानों में मतभेद है.

अब सुनो इसकी कहानी . ये कीड़ा पत्ता गोभी का नहीं है. तो किसानों पर रहम करो. ये भी सोचो कि पत्ता गोभी बंद हो गई तो चाऊमीन में क्या पड़ेगा. ये कीड़ा यानी वर्म वेस्ट अफ्रीका से आया है. इसका नाम है लोआ लोआ. क्यूट नाम है न. लेकिन कीटाणु बहुत खतरनाक है. वहां अफ्रीका में ये दूसरे खून पीने वाले कीड़े पर सवारी करता है. उस कीड़े का नाम है मैंगो फ्लाई. मच्छर जैसा होता है. लेकिन मच्छर लोग डंक घुसेड़कर खून चूसते हैं. ये कीड़ा हल्का सा चीरा मार देता है और बहते खून को चाट जाता है. उसी प्रक्रिया में ये लोआ लोआ का लार्वा शरीर में घुस जाता है.

बाईं तरफ मैंगो फ्लाई और दाईं तरफ लोआ लोआ

फिर ये बढ़ने लगता है. पूरे शरीर में विजय रथ लेकर भ्रमण करता है. लेकिन दिखता तभी है जब आंख में आ जाए. क्योंकि आंख शरीर का वो पार्ट है जो बाहर ही रखी होती है. दूसरी वजह है कि आंख बहुत ठंडी जगह होती है, क्योंकि बाहर होती है. तो ये भाईसाब वहां जाकर अपना डेरा जमा लेते हैं और पकड़ में आ जाते हैं. अब आंख में आकर पकड़ में आ गए तो अच्छा है. नहीं तो ये दिमाग में, फेफड़ों में और दिल में भी जगह बना सकता है. अगर जिंदा पकड़ में आ गया तो बहुत सही है. नहीं तो मेडिकल लाइन में इसके लिए दवाएं भी हैं. जो इस वर्म को शरीर के अंदर ही मार देती हैं. लेकिन इसकी डेडबॉडी जिंदे से ज्यादा खतरनाक है. उसकी वजह से इन्फेक्शन हो सकता है और मौत हो सकती है.

भारत कैसे पहुंचे

अब पूछो कि ये वेस्ट अफ्रीका से इंडिया कैसे पहुंचे? मैंगो फ्लाई उड़ के तो नहीं आ सकते. तो सफर के लिए मैंगो फ्लाई उधर से आने वाले पानी के जहाज वगैरह का इस्तेमाल करते हैं. उनका कौन टिकट चेक करेगा?

सिर्फ इंसानों को काटता है

ये डंक नहीं गड़ाते, कट मार के खून पीते हैं

ये इंट्रेस्टिंग बात है कि ये मैंगो फ्लाई सिर्फ इंसानों को काटता है. और किसी जानवर को नहीं. बंदरों को भी नहीं. पता नहीं इंसानों का खून इसको इत्ता मीठा काहे लगता है. उससे भी बड़ी बात ये है कि ये साहब पैदा तो जंगल में होते हैं. भागते हैं शहर की तरफ. उसकी वजह ये है कि इनकी दोस्ती कार्बन डाई ऑक्साइड से है. उस गैस में ये अच्छे से रह सकते हैं. जंगल में तो पेड़ ऑक्सीजन छोड़ते हैं. शहर में इंसान है जिसके पास कार्बन डाई ऑक्साइड का भंडार है. सांस छोड़ता है तो भी वही, कूड़ा कचरा जलाता है तो भी वही गैस निकलती है. तो इससे बचने का रास्ता भी यही है कि साफ सफाई रखो. जैसे मच्छरों से बच जाते हो, वैसे मैंगो फ्लाई से बच जाओगे. मैंगो फ्लाई से बच गए लोआ लोआ से बच जाओगे.



साभार https://www.thelallantop.com/jhamajham/reality-of-viral-video-that-shows-cabbage-worm-removed-from-eye/

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