औरत की तकदीर

01 अप्रैल 2018   |  शालिनी कौशिक एडवोकेट   (82 बार पढ़ा जा चुका है)

 औरत की तकदीर  - शब्द (shabd.in)

औरत की तकदीर में देखो ,हरदम रोना-धोना है ,

मिलना उसको नहीं है कुछ भी ,सब कुछ हर पल खोना है ,

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तड़प रहेगी उसके दिल में ,जग में कुछ कर जाने की ,

नहीं पायेगी वो कुछ भी कर ,बोझ जनम का ढोना है ,

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सपना था इस जीवन में कि सबके काम वो आएगी ,

सच्चाई ये उसका जीवन ,सबकी रोटी पोना है ,

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टूट रही है तिल-तिल गलकर ,कुछ भी हाथ न आता है ,

पता चल गया भाग्य में उसके ,थक हारकर सोना है ,

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नारी जीवन में देने को ,प्रभु की झोली खाली है ,

''शालिनी '' का मन तड़पाकर ,भला देव का होना है ,

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शालिनी कौशिक

[कौशल ]

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sarita prasad
04 अप्रैल 2018

बहुत सुंदर

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