"दोहा"

09 अप्रैल 2018   |  महातम मिश्रा   (50 बार पढ़ा जा चुका है)

"दोहा"


हरिहर तुम बिन कौन अब हरे जगत की पीर

मंशा मानस पातकी शीतल करो समीर।।-१


प्रभु आया तुम्हरी शरण तुम हो तारणहार

तन मन धन अर्पण करूँ हे जग पालनहार।।-२


सुख संपति सुंदर भवन निर्मल हो व्यवहार

घात हटे घट-घट घृणा घटना हटे कुठार।।-३


मूरख मनवा हरि बिना भरे न भव्य विचार

कामधेनु बिन बाछड़ा महिमा अपरम्पार।।-४


पारिजात हरि बिनु कहाँ ऊसर कहाँ अनार

रजनीगंधा रात की दिन में कहाँ अन्हार।।-५


महातम मिश्र गौतम गोरखपुरी

अगला लेख: “हरियाली”



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
02 अप्रैल 2018
"वैशाख की वैशाखी"अंदाजा लगाना मुश्किल है कि किसने किसको कब और कैसे मूर्ख बनाया होगा। मार्च यानी चैत्र माह हिसाब-किताब का महीना है कर लेने देने के साथ ही साथ कर चोरी के रसिया तरह-तरह के फार्मूले लेकर बाजार में मार्च की अनबुझी टोकरी में अपना सौदा सजाकर कर मार्च का अजूबा फल
02 अप्रैल 2018
02 अप्रैल 2018
मापनी - २१२२ २१२२ २१२२ २१२२“मुक्तक ”जब प्रत्यक्ष हम हुये तो जान पाये तुम घिरे थे। बाढ़ में बहने लगे तुम मय लिए हम भी फिरे थे। रुख डुबाने लग पड़ी थी जब तुम्हें मंझार घेरे- उठ न पाते तुम कभी भी जिस जगह जाकर गिरे थे॥-१ पर परोक्ष हो गए जब तुम किनारे खो गए थे। उस समय सोचा नहीं क
02 अप्रैल 2018
05 अप्रैल 2018
कुंडलिया संचालक चालक सखा सत्य समय अनुसार घड़ी दिखाती है समय अब पकड़ो रफ्तार अब पकड़ो रफ्तार समय हो गया रेल का हम सफ़री रखवार स्वस्थ हो गमन मेल का कह गौतम कविराय मुसाफिर किसका पालकसीटी दो सरकार लौह पथ के संचालक॥ महातम मिश्र गौतम गोरखपुरी
05 अप्रैल 2018
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x