बातें कुछ अनकही सी...........: सिसकी

19 अप्रैल 2018   |  युगेश कुमार   (232 बार पढ़ा जा चुका है)

बातें कुछ अनकही सी...........: सिसकी

सिसकी जो निकली तो जान निकल गयी

हैरत तो तब हुई जब बच्ची बच्ची नहीं

हिन्दू और मुसलमान निकल गयी

कठुआ हो या उन्नाव

या कोई और जगह

माँ को तकलीफ तब हुई

जब बच्ची घर से परेशान निकल गयी

कहीं दुबक के बैठी थी वेदना

वेदना का चोला ओढ़े जब

राजनीति बेशुमार निकल गयी

निर्भया के आँसू अभी सूखे नहीं थे

इंसानियत बेसुध पड़ी रही मंदिर में

हैवानियत उससे होकर सरेआम निकल गयी

©युगेश

बातें कुछ अनकही सी...........: सिसकी

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