सुमन और सुगंध

26 अप्रैल 2018   |  रवीन्द्र सिंह यादव   (88 बार पढ़ा जा चुका है)

सुगंध साथ सुमन के


महकती


ख़ुशी से रहती है,


ये ज़ंजीर न बंधन के


चहकती


ख़ुशी से रहती है।


फूल खिलते हैं


हसीं रुख़ देने


नज़ारों को,


तितलियाँ


आ जाती हैं


बनाने ख़ुशनुमा


बहारों को।


कभी ढलकता है


कजरारी आँख से


उदास काजल,


कहीं रुख़ से


सरक जाता है


भीगा आँचल।


परिंदे भी आते हैं


ख़ामोश चमन में


पयाम-ए-अम्न लेकर,


न लौटा कभी


गुलिस्तान से


भारी मन लेकर।


#रवीन्द्र सिंह यादव


शब्दार्थ / WORD MEANINGS


सुगंध = महक, ख़ुशबू / FRAGRANCE


सुमन = पुष्प , फूल / FLOWER


ज़ंजीर= साँकल ,शृंखला / CHAIN


,हसीं = सुन्दर ,ख़ूबसूरत / BEAUTIFUL


कजरारी आँख = आँख जिसमें काजल लगा हो , काजलयुक्त आँख / EYE WITH KOHL


रुख़ = चेहरा ,दृटिकोण , चेहरे पर नज़र आने वाला भाव, दिशा / FACE , APPEARANCE, DIRACTION


चमन = बाग़/ FLOWER GARDEN


पयाम-ए-अम्न= शान्ति का सन्देश / MESSAGE OF PEACE


गुलिस्तान= बाग़ / FLOWER GARDEN


अगला लेख: मित्र संबंधी



आदर आभार आपका आदरणीय उत्साहवर्धन के लिए.

बहुत सुंदर

रेणु
28 अप्रैल 2018

भावपूर्ण रचना आदरणीय रवीन्द्र जी | सचमुच सुगंध और सुमन किसी को भी खाली हाथ नहीं लौटाते | हर कोई अपनी झोली में ख़ुशी लेकर लौटता है | और भारी मन लेकर तो कभी नहीं | | सादर --

आदर आभार आदरणीया रेणु जी मनोबल बढ़ाने के लिए .

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
अंग्रेजी  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x