वो तो सिर्फ एक ख्याल भर है

04 मई 2018   |  vikas khandelwal   (60 बार पढ़ा जा चुका है)

खुद को गैरो के लिए कुरबान कर देता हु



काफ़ी कोशिश कि मैंने ,



फिर भी अच्छा इन्सान नहीं बन पाता हु



कभी खुद को देखता हु , कभी आईने को



अब पहले जैसा खुद को नहीं पाता हु



वो तो सिर्फ एक ख्याल भर है



मै प्यार नहीं करता उनसे ना किसी और से



बस खुद को बहलाता हु



दुनिया के मेले मे ख़ुद को तन्हा पाता हु



माँ अब तेरा आँचल नहीं है , तेरी लोरिया भी नहीं



और तेरा प्यार भी नहीं , और तू भी नहीं



कोशिश दिल से करता हु ,



फिर भी तेरा राजा बेटा नहीं बन पाता हु



अपनी नज़रो मे खुद को शर्मिन्दा पाता हु



मै बदला हु या दुनियाँ , मुझे नहीं पता



मै तो हर पल को जीता हु



कोई मुझे हरा दे ऐसा भी नहीं , मै किसी से हार जाऊ ऐसा भी नहीं



मै तो हर दिल मे ईश्वर को पाता हु



पापा तुम्हारी उंगलिया क्या छुटी मेरे हाथो से



सारी दुनिया वीरान पाता हु



मै अब अपने मे हि रहता हु



यादो मे तुम्हारी दिन रात खोया रहता हु



मैंने मुस्कुराना कब का छोड़ दिया है



आँखों मे अपनी ,



तुम्हारी तस्वीर और समन्दर दोनों रखता हु



काफी कोशिश करता हु



फिर भी तुम्हारा राजा बेटा नहीं बन पाता हु



खुद को अपनों के लिए कुरबान कर देता हु



काफी कोशिश करता हु ,



फिर भी अच्छा इन्सान नहीं बन पाता हु


अगला लेख: माँ तुम बड़ी याद आती हो



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
18 मई 2018
बदलती प्रकृति बदलती हरियाली और बदलता ये जहा ये मौसमे और की मानवों बढ़ती की आबादी ये बरसात के बुँदे और गर्मी में पशीनो की बुँदे ये लेती करवटे मोसमे न वर्षा ऋतू न बसंत ऋतू और गर्मी में भी बरसते बदल के बुँदे एक _दूसरे के
18 मई 2018
02 मई 2018
तु
शाम हो गई तुम्हे खोजते माँ तुम कब आओगीजब आओगी घर तुम खाना तब ही तो मुझे खिलाओगी, रात भर न सो पाई करती रही तुम्हारा इंतजारसुबह होते ही बैठ द्वार निगाहें ढूंढ रही तुम्हे लगातार,पापा बोले बेटा आजा अब माँ न वापिस आएगी अब कभी भी वह तुम्हे खाना नहीं खिलाएगी,रूठ गई हम सब से मम्मी ऐसी क्या गलती थी हमारीछोड
02 मई 2018
10 मई 2018
दो दिल जहाँ नज़दीक हों और खुल के मन की बात होवो पल अगर तुम थाम लो हरदम सुहानी रात हो झुलसा सा तन उलझा सा मन और तुम कहीं से आ गएनभ में घटाएं छा गईँ कैसे ना अब बरसात हो ओस से भीगा समां और ठंडी ठंडी ये सुबहतुम ढली जाती हो मुझपे ज्यूँ महकता पारिजात हो प्यार का गुल खिल गया तो फिर ये मुरझाता नहींचाहे मुकद
10 मई 2018
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x