बातें कुछ अनकही सी...........: अहं

08 मई 2018   |  युगेश कुमार   (70 बार पढ़ा जा चुका है)

बातें कुछ अनकही सी...........: अहं

धृतराष्ट्र आँखों से अंधा

पुत्र दुर्योधन अहं से अंधा था

उसकी नज़रों से देखा केशव ने

चारों ओर मैं ही मैं था|1|

जब भीम बड़े बलशाली से
बूढ़े वानर की पूँछ न उठ पाई
बड़ी सरलता से प्रभु ने
अहं को राह तब दिखलाई|2|


जैसे सुख और माया में
धूमिल होती एक रेखा है
वैसे मनुज और मंज़िल के बीच
मैंने अहं को आते देखा है|3|


जितनी जल्दी ये ज़िद छुटे
अहंकार का कार्य रहे,अहं छुटे
मनुज को भान स्वयं का होता है
सूर्य वही उदय तब होता है|4|
©युगेश

बातें कुछ अनकही सी...........: अहं

https://yugeshkumar05.blogspot.com/2018/05/blog-post.html

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