दर्द

08 मई 2018   |  आशुतोषआशुतोष मिश्रमिश्र तीरथतीरथ   (93 बार पढ़ा जा चुका है)

दर्द जुदाई का


शहीद सैनिक की वधु से पूछो दर्द जुदाई का।
भूल न पाती ताउम्र समय वह अंत विदाई का।।

स्वप्न कई सलोने लेकर वह ससुराल आई थी।
ख्वाबों में ही दुनिया एक उसने सजाई थी।।

जाकर मैं ससुराल प्रसन्नचित पिया संग रहूंगी।
मांग सिंदूर माथे बिंदी हाथे नौ चूड़ियाँ पहनूंगी।।

रंग मेंहदी के अभी उसके हाथों से न छूटे था।
परन्तु प्रत्येक स्वप्न सलोने इक पल में टूटे थे।।

अभी कानों में स्वर गूंज रहा उसके सहनाई का।
आखिर कैसे भूलेगी वह अंत समय विदाई का।।

पिया मिलन की आश लगाए वह बैठी रहती थी।
आएंगे शीघ्र युद्ध पश्चात पिया सबसे कहती थी।।

भूल न पाई वह पिया संग सैनिकों का आना।
लड़खड़ाती उंगली से कुछ शब्द लिख जाना।।

जिसे जला दिया उसने समझ पर्चा दवाई का।
जाकर कोई पूछे उससे दुःख अंत विदाई का।।

याद आए हरदम प्रियतम बोल वह हरजाई का।
शहीद सैनिक की वधु से पूछो दर्द जुदाई का।।

आशुतोष मिश्र
तीरथ सकतपुर
कापीराइट एक्ट के अंतर्गत

अगला लेख: इंतजार



सैनिक की पत्नियों को समाज कभी वह सम्मान नही दे पाता जिनकी वे हकदार होती हैं।
आपने एक शाहिद की पत्नी के मनोभाव रचना में प्रस्तुत किये आपका आभार।
जय हिंद जी जवान

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
सम्बंधित
लोकप्रिय
जी
24 अप्रैल 2018
रि
27 अप्रैल 2018
गी
03 मई 2018
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
अंग्रेजी  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x