"अब कितनी बार बाँटोगे"

14 मई 2018   |  महातम मिश्रा   (57 बार पढ़ा जा चुका है)

"अब कितनी बार बाँटोगे"


अब कितनी बार बाँटोगे यही कहकर सुनयना ने सदा के लिए अपनी बोझिल आँख को बंद कर लिया। आपसी झगड़े फसाद जो बंटवारे को लेकर हल्ला कर रहे थे कुछ दिनों के लिए ही सही रुक गए। सुनयना के जीवन का यह चौथा बंटवारा था जिसको वह किसी भी कीमत पर देखना नहीं चाहती थी सबने एक सुर से यही कहा कि दादी किसी भी बंटवारे से बहुत दुखी हो जाती थीं। जब वह व्याह कर आयी तो इस परिवार का पहला बंटवारा अजिया ससुर का हुआ था जो इन्हें अच्छा तो न लगा पर कर ही क्या सकती थी। कुछ एक साल ही बीता कि इनके ससुर जो दो भाई थे अलग-बिलग हो गए, लोग बताते हैं कि चार दिनों तक इन्होंने खाना नहीं खाया था और निश्चय कर लिया कि अपने पति को उनके भाइयों से अलग नहीं होने दूँगी। मिशाल भी कायम किया सुनयना ने बहुत कुछ सहन करके परिवार को एकजुट रखा पर समय के परिवर्तन किसका बस चला है टूट गईं जब परिवार तीसरी बार बँटकर बिखर गया। न वह शान रही न मर्यादा सब कुछ मिट्टी में मिलते अपनी उन्हीं आँखों से देखती रही जिसकी सुंदरता से बशीभूत होकर उनके पिता जी ने सुनयना नाम रखा था।


उम्र जब पचासी पार कर गई तो उनके खुद के बच्चों ने कलह शुरू कर दिया। सुनयना ने बहुत समझाया कि मेरे मरने के बाद ही अब तुम लोग अपने मन की करना, मेरे जीते जी चौथा बँटवारा संभव नहीं है। दश वर्ष कसमकश में निकला और उनके तीनो लड़के अपने बाल-बच्चों को लेकर शहर पकड़ लिए पर पुस्तैनी जमीन का मोह लिए सुनयना ने घर को अपने कमजोर हाथों से अकेले पकड़े रखा कि गर्मी की छुट्टी में सबका आना हुआ और बँटवारे की मंशा बलवती हो गई और श्राद्ध कर्म करके पूर्ण भी हो गई। सुनयना के एक नाती ने याद दिलाया कि दादी के तस्वीर के नीचे लिखवा दो न पापा,कि "अब कितनी बार बाँटोगे"


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

अगला लेख: यह एक स्वस्थ सुझाव



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
01 मई 2018
“दोहा”चक्र सुदर्शन जोर से घूम रहा प्रभु हाथरक्षा करें परमपिता जग के तारक नाथ।।-१ जब जब अंगुली पर चढ़ा चक्र सुदर्शन पाशतब तब हो करके रहा राक्षस कुल का नाश।।-२ महातम मिश्र गौतम गोरखपु
01 मई 2018
01 मई 2018
“गीत”क्या सुनाऊँ आप को जब आप दिल में आ बसेनैन तो कबसे विकल थे चैन दिल में आ बसे........ क्या सुनाऊँ आप को.....देखना जी इस गली में और भी गलियाँ बहुत रुक न जाना छोड़ राहें मोड़ भी मिलते बहुत क्या भला फरियाद होगी यह गली अंधेर मेंछाया न आती दिन बताने रैन दिल में आ बसे......क्या
01 मई 2018
04 मई 2018
“मुक्तक”सम्मानित है किर्ति कहीं भी कैसी भी हो मंदिर मंदिर राम मूर्ति सीता जैसी हो मर्यादा बहुमान दिलाये वन में मन मेंशासक पालक नेक बाग मधुबन ऐसी हो॥-१ धोखा दे अपकीर्ति अचानक आँधी आए सुख सुविधा अरु आन मान माटी मिल जाएसोचो समझो यार रार मत पालों मन में सुलभ शुद्ध संगीत राग क
04 मई 2018
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x