अलविदा ,,,,,,

17 मई 2018   |  नृपेंद्र कुमार शर्मा   (40 बार पढ़ा जा चुका है)

मुझको क्षमा करना मित्रों मैं जा रहा हूं छोड़कर ,
मेरे शब्दों को शब्दनगरी पर उचित पहचान ना मिली।

रचनाओं को लिखा कितने अरमानो से सदा ,
पर मेरी रचनाओं पर वाहवाही की कभी काली न खिली।

बहुत अपने थे कभी यहां सराहते थे हमे भी,
किन्तु लगता है उन सभी ने यहां से अपनी राहें बाद लीं।

एक लेखक एक कवि एक भाव भरा ह्रदय,
बस चाहे टिप्पड़ियां सदा निज कृति पे,
लेकिन यहां लिखने पर वह भी न मिली।

अलविदा शब्दनगरी।

अगला लेख: बिटिया।



दीदी आपके अलावा कोई और मुझे नहीं पढ़ता यहाँ,, फिर भी आपके कहने से मैं कोशिश करूंगा ।

दीदी आपके अलावा कोई और मुझे नहीं पढ़ता यहाँ,, फिर भी आपके कहने से मैं कोशिश करूंगा ।

रेणु
24 जुलाई 2018

पिय नृपेन्द्र -- हमे इस मंच के सम्मान के लिए यहाँ -- आना चाहिए मेरा तो यही निर्णय है | यहाँ से हमे बहुत बड़ी पहचान मिली है आप से प्रार्थना है कि इस मंच से दुबारा जुड़ें | सस्नेह --

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