बदलती प्रकृति और मौसमे (By deendyal saroj)

18 मई 2018   |  deendyalsarojknk95gamilcom   (158 बार पढ़ा जा चुका है)

बदलती प्रकृति और मौसमे (By deendyal saroj)

बदलती प्रकृति बदलती हरियाली और बदलता ये जहा ये मौसमे और की मानवों बढ़ती की आबादी ये बरसात के बुँदे और गर्मी में पशीनो की बुँदे ये लेती करवटे मोसमे न वर्षा ऋतू न बसंत ऋतू और गर्मी में भी बरसते बदल के बुँदे एक _दूसरे के बढ़ते हौसले में कुचलते गरीब ये बच्चे य ये मोसमे और करवटेंऔर बदलती ये प्रकृति मंजिलो को पाने में जंगलो और प्रकृति की हानियाँ की पहले न थी इतनी आबादी और न थी इतनी समस्या ये बदलती प्रकृति और बदलती ये जहा ये बढ़ती आबादी और आवास की आड़ में ये बढ़ती हुई तापमान और बढ़ती जल की समस्या

बदलती प्रकृति और मौसमे (By deendyal saroj)
बदलती प्रकृति और मौसमे (By deendyal saroj)
बदलती प्रकृति और मौसमे (By deendyal saroj)

अगला लेख: मैं अपने आप को कही भूल आया हु



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x