एक इश्क़ जो अभी हुआ नहीं ||

20 मई 2018   |  नीरज अग्रहरि   (115 बार पढ़ा जा चुका है)

एक इश्क़ जो अभी हुआ नहीं ||

'' एक सूरज जो अभी ऊगा नहीं ,


एक चंदा जो अभी डूबा नहीं |


एक कुसुम जो अभी खिला नहीं ,


एक भौंरा जो अभी पराग चुना नहीं |


एक मशाल जो अभी जला नहीं ,


एक मिशाल जो अभी बना नहीं |


एक इश्क़ जो अभी हुआ नहीं ,


एक रिस्क जो अभी लिया नहीं |


एक किसान अभी हँसा नहीं ,


क्यूंकि उसकी फसल अभी कटा नहीं |


एक महान जो अभी हुआ नहीं ,


एक गान जो अभी बना नहीं |


एक महल जो अभी बना नहीं ,


एक पहल जो कभी हुआ नहीं |


एक शीशा जो अभी दिखा नहीं ,


एक किस्सा जो अभी सुना नहीं |


एक कमल जो अभी हुआ नहीं ,


एक धमाल जो कभी भूला नहीं |


एक जूनून जो अभी हुआ नहीं ,


एक सुरूर जो अभी चढ़ा नहीं |


एक गड्ढा जो पटा नहीं ,


एक पत्थर जो कभी हटा ही नहीं |


एक सरिता जो बही नहीं ,


एक कविता जो कभी बनी ही नहीं |"


अभी हुआ नहीं |||||



नोट - यह कविता मेरी अपनी जीवन की प्रतिकृति है |

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