जिन्दगी क्या?????एक हलवाई की दूकान...

21 मई 2018   |  गौरीगन गुप्ता   (93 बार पढ़ा जा चुका है)

इस मायावी दुनिया में भाँती -भांति के लोग,

सबकी अपनी जिन्दगी,कोई अदरक तो कोई सोंठ,

किसी की जगह आलू जैसी,तो कोई थाली का बैगन,

अहमियत होती सबकी अपनी,जैसे व्यंजन ों में नोन,

रसगुल्ले का रस-सा घोलती माँ की प्यारी लोरियां,

पेड़े पर छपी चन्द्र कलाएं जैसी बच्चों की ह्ठ् खेल ियाँ,

गुझियाँ -सा बंधा परिवार में बड़ों का अनुशासन,

वही रसमलाई का रिश्तों में घुलता अपनापन,

मुस्कान लाती चेहरे पर,बाते चटपटी समोसे जैसी दोस्त-यारों की,

उबली दाल जैसे नीरस जीवन में,रंगीन मसालों का तडका लगाती,

ढकोसले लोगो की लोलुपता में जलेबी की चाशनी टपकती,

मतलबियों कीबातें,टेडी-मंदी,गोल-गोल इमरती-सी,

सोनपापड़ी,गजक पट्टी -सा जीवन भर संघर्ष करते जाते,

फिर भी, 'ऊंची दुकान ,फीके पकवान-सा' जीवन जीते,

मिक्स दाल रूपी जीवन में , 'शुद्ध घी'का बघार लगा दिया,

फिर भी,'मोती चूर के लड्डू'की तरह जीवन बिखर गया,

जीवन के रस हैं - मीठा,नमकीन,खट्टा,तीखा,कडवा,

पंचरस मिश्रित स्वाद हैं,सबका 'अपनी-अपनी जिन्दगी का'

अगला लेख: उम्मीद नही सहयोग की ......



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
20 मई 2018
मो
बरसात के मौसम में मोहब्त हो ना जाए दिल तुझको देख के तुझे पाने को मचल ना जाए सितारा टूट ना जाए चाँद अकेला हो ना जाए तन्हा रात मे दीवाना हो ना जाए ऐ
20 मई 2018
15 मई 2018
छोटा-सा ,साधारण -सा मध्यमवर्गीय हमारा परिवार,अपनेपन की मिठास घोलता,खुशहाल परिवार का आधार,परिवार के वो दो मजबूत स्तम्भ थे बावा -दादी,आदर्श गृहणी थी माँ,पिता कुशल व्यवसायी,बुआ,चाचा साथ रहते,एक अनमोल रिश्ते में बंधते,बुजुर्गो की नसीहत से समझदार और परिपक्व बनते,मुखिया बावा
15 मई 2018
25 मई 2018
मै
कच्ची उम्र हैं,कच्चा हैं रास्ता,पर, पक्की हैं दोस्ती,पक्के हैं हम,उम्मीदों,सपनों का कारवां लेकर चलते,खुद पर भरोसा कर,कदम आगे बढाते,चुनौतियाँ बहुत हैं,ख्वाब हैं लम्बे,पर, जन्मभूमी ही हमारी पाठशाला होती,धरती की नींव में अपनी रूढ़ जमाए,दिन-रत समय की चक्की में पिसते,सुकोमल-सा पुष्पों जैसा मेरा जीवन......
25 मई 2018
23 मई 2018
छोटा-सा,साधारण-सा,प्यारा मध्यमवर्गीय हमारा परिवार,अपने पन की मिठास घोलता,खुशहाल परिवार का आधार,परिवार के वो दो,मजबूत स्तम्भ बावा-दादी,आदर्श गृहणी माँ,पिता कुशल व्यवसायी,बुआ-चाचा साथ रहते,एक अनमोल रिश्ते में बंधते,बुजुर्गों की नसीहत से,समझदार और परिपक्व बनते,चांदनी जैसी शीतलता माँ में,पिता तपते सूरज
23 मई 2018
21 मई 2018
प्
प्यार का मुझपे से जरा बुखार उतर जाने दो बारिश कि कुछ बुँदे मुझपे जरा गिर जाने दो दिल के हालत जरा संभल जाने दो फिर आना तुम मेरे अंगना पहले आदमी को आदमी जरा बन जाने दो तुम क्या जानो
21 मई 2018
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x