प्रिय की दृष्टि में प्रेयसी !

22 मार्च 2015   |  डॉ. शिखा कौशिक   (707 बार पढ़ा जा चुका है)

पीत वसन में लगती हो तुम
महारानी मधुमास की !
ओढ़ दुपट्टा रंग गुलाबी
लगती कली गुलाब की !
वसन आसमानी कर धारण
खिल जाता है गौर वदन !
लाल रंग के वस्त्रों में तुम
दहकी लता पलाश की !
हरा रंग तो तुम पर जैसे
नयी बहारें लाता है !
हरियाली पीली पड़ जाती
रूप तुम्हारा देखकर !
श्वेत वसन में तुम्हें देखकर
मुझको ऐसा लगता है ,
आई चांदनी आज धरा पर
छवि तुम्हारा धर कर है !


शिखा कौशिक 'नूतन' :

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Rajat Vynar
23 मार्च 2015

यह कविता कोर्स की किताब में तो नहीं आ जायेगी न? अच्छी कविता है.

विविध रंगों से सजा इन्द्रधनुष अत्यंत सजीला एवं मनमोहक है.
धन्यवाद!

lagbhag satya abhivyakti .

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