“कुंडलिया”

24 मई 2018   |  महातम मिश्रा   (78 बार पढ़ा जा चुका है)

 “कुंडलिया”

“कुंडलिया”


भरता नृत्य मयूर मन ललक पुलक कर बाग

फहराए उस पंख को जिसमें रंग व राग

जिसमे रंग व राग ढ़ेल मुसुकाए तकि-तकि

हो जाता है चूर नूर झकझोरत थकि-थकि

कह गौतम कविराय अदाकारी सुख करता

खुश हो जाता खंड दंड पावों में भरता॥


महातम मिश्र गौतम गोरखपुरी

अगला लेख: “झरोखे से झाँकती सुबह”



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
18 मई 2018
“मुक्तक” सुधबुध वापस आय करो कुछ मनन निराला। जीत गई है हार भार किसके शिर डाला। मीठी लगती खीर उबल चावल पक जाता-रहा दूध का दूध सत्य शिव विजय विशाला॥-१हम बचपन के साथी क्या डगर चाहना है। अभी क्या उमर है क्या जिगर भावना है। खेलते तो हैं खग मृग मिल लड़ाते हैं पंजे- क्या पता कि
18 मई 2018
28 मई 2018
“कता/मुक्तक.”छन्द- वाचिक गंगोदक (४० मात्रा क्रमागत दो-दो चरण तुकान्त मापनीयुक्त मात्रिक) मापनी - २१२ २१२ २१२ २१२ २१२ २१२ २१२ २१२ अथवा - गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा गालगाचीन का दाँव ही पाक की ढाल है देख पाया कभी क्या उड़ा की गिरा।मुफ्त का माल है खा रहा पाल है
28 मई 2018
10 मई 2018
“कुंडलिया” गागर छलके री सखी पनघट पानी प्यासआतुर पाँव धरूँ कहाँ लगी सजन से आसलगी सजन से आस पास कब उनके जाऊँ उपसे श्रम कण बिन्दु पसीना पलक दिखाऊँकह गौतम कविराय आज भर लूँगी सागर पकड़ प्यार की डोर भरूँगी अपनी गागर॥ महातम मिश्र गौतम गोरखपुरी
10 मई 2018
28 मई 2018
“झरोखे से झाँकती सुबह”अमूमन हर रात को आने का अंदेशा पूर्ववत होता ही है शायद इस रात को भी खबर है कि आज नहीं तो कल मैं भी जरूर आऊँगी पर जब आई तो भावनाओं को झंझोड़कर एक नई सुबह कर गई और याद आने लगे वे दिन जो कभी रात को रात होने ही नहीं देते थे। कितना प्रकाश था उस विशाल मन में
28 मई 2018
28 मई 2018
“कुंडलिया”पाती प्रेम की लिख रहे चित्र शब्द ले हाथ।अति सुंदरता भर दिये हरि अनाथ के नाथ।।हरि अनाथ के नाथ साथ तरु विचरत प्राणी।सकल जगत परिवार मानते पशु बिनु वाणी।।कह गौतम कविराय सुनो जब कोयल गाती।मैना करे दुलार पपीहा लिखता पाती॥-१लचकें कोमल डालियाँ अपने अपने साख।उड़ती नभ तक प
28 मई 2018
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x