एक मुस्लिम लड़के को भीड़ के हाथों मरने से एक सिख पुलिसवाले ने बचा लिया !

24 मई 2018   |  रितिका चटर्जी   (170 बार पढ़ा जा चुका है)

एक मुस्लिम लड़के को भीड़ के हाथों मरने से एक सिख पुलिसवाले ने बचा लिया !

गगनदीप सिंह उत्तराखंड पुलिस में सब-इंस्पेक्टर हैं. सैकड़ों की भीड़ के सामने उन्होंने एक मुस्लिम लड़के की जान बचाई. भीड़ इतनी भड़की हुई थी कि शायद उस मुस्लिम लड़के को लिंच कर देती. वजह ये कि वो एक हिंदू लड़की के साथ मिला था. भीड़ के शब्दों में, पकड़ा गया था.

उत्तराखंड का नैनीताल जिला. यहां रामनगर नाम की एक जगह है. रामनगर में गिरिजा नाम का गांव. यहां गिरिजा देवी का एक मशहूर मंदिर है. ये इलाका जिम कॉर्बेट नैशनल पार्क की दहलीज में आता है. एकदम छोर पर. बहुत नामी-गामी मंदिर है ये. बड़े लोग आते हैं यहां देवी के दर्शन वास्ते. ये मंदिर जंगल के बीच है. रामनगर शहर से करीब 14-15 किलोमीटर दूर. पास से एक नदी होकर बहती है. शायद ऐसी लोकेशन की वजह से ही यहां खूब सारे जोड़े भी आते हैं. इस उम्मीद में कि एकांत मिलेगा. 22 मई, 2018. इस दिन भी एक कपल छुपकर मंदिर में मिलने आया. और पकड़ा गया. पूछताछ में मालूम चला कि लड़का मुसलमान है. लड़की हिंदू है. इसके बाद खूब हंगामा हुआ. भीड़ जुट गई. भीड़ उस मुस्लिम लड़के को पीटना चाहती थी. हो सकता था कि उस दिन वहां वो लड़का पीटकर मार डाला जाता. मगर ऐसा नहीं हुआ. लिंचिंग न होने देने की पूरी वाहवाही एक पुलिसवाले के नाम है. और उस पुलिसवाले का नाम है गगनदीप सिंह. गगनदीप उत्तराखंड पुलिस में सब-इंस्पेक्टर हैं.

गगनदीप सिंह उत्तराखंड पुलिस में हैं. रामनगर में पोस्टेड हैं.

पीटने का मौका नहीं मिला, तो लोग पुलिस के लिए भी हाय-हाय करने लगे
इस घटना के कुछ विडियो मिले हैं हमें. हमारे एक पाठक ने हमें मेसेज करके ये विडियो भेजा. हमने तफ्तीश करके सच्चाई मालूम की. इस घटना से जुड़े एक विडियो में आपको दिखेगा. कि एक भीड़ जमा है. लोग गुस्से में हैं. उनके बीच गगनदीप सिंह उस लड़के को थामे लोगों को समझा रहे हैं. लोग कह रहे हैं कि वो उस लड़के को पीटना चाहते हैं. मगर गगनदीप सिंह की कोशिश है उसे सुरक्षित भीड़ से निकालकर ले जाना. इसी बीच भीड़ में शामिल कुछ लोग उस लड़के को पीटने की कोशिश करते हैं. और गगनदीप उस लड़के को बचाने के लिए उसे अपने सीने से चिपटा लेते हैं. लोग गगनदीप पर भी नाराज हो रहे हैं. क्यों? क्योंकि गगनदीप अपनी ड्यूटी कर रहे हैं. लोगों ने मंदिर का गेट बंद करके गगनदीप को रोकने की भी कोशिश की. विडियो में आप देखेंगे. कि वहां कितना तनाव था. वो जब उस लड़के को निकालकर ले जाने लगते हैं, तो भीड़ नारेबाजी करती है. पुलिस-प्रशासन हाय हाय टाइप.

ये एक विडियो का स्क्रीनशॉट है. भीड़ ने इस जोड़े को घेरा हुआ है. बातें सुनकर मालूम पड़ता है कि भीड़ ने लड़के की पिटाई की थी. भीड़ के कुछ लोग लड़की को भी काट डालने की धमकी दे रहे हैं. क्योंकि वो हिंदू ‘होकर भी’ मुसलमान लड़के के साथ घूम रही है.

‘मैं तो इसको गाड़ दूंगा, तेरे को भी काट दूंगा’
इस घटना का विडियो है. इसमें भीड़ ने उस जोड़े को घेरा हुआ है. लड़का जमीन पर बैठा है. भीड़ ने उसे पीटा है. लड़की खड़ी है और भीड़ से बहस कर रही है. वो भीड़ में खड़े किसी आदमी से सवाल करती है- अंकल, आपने उसको (लड़के को) मारा क्यों? इसपर वो आदमी कहता है- (गाली के साथ) इसको काट डालेंगे. (लड़की को गाली) हिंदू होकर मुसलमान के साथ घूम रही है. इसको भी मारो. हिंदू के नाम पर कलंक है तू (फिर गाली). मैं तो इसको (लड़को को) गाड़ दूंगा. और तेरे को भी काट दूंगा. काट (गाली) इसको. इसके बाद जमीन पर बैठा वो लड़का खड़ा होता है और वहां से जाने लगता है. लेकिन लोग उन दोनों को गाली दे ही रहे हैं. बीच में एक भगवा रंग का कुर्ता पहने और गले में भगवा गमछा डाले एक आदमी नजर आता है. वो उस लड़के का हाथ पकड़कर उसे कहीं ले जाता दिखता है. उसके साथ पीछे-पीछे लगी भीड़ आ रही है. ये भगवा कपड़े वाला आदमी रौब से उस लड़के का नाम पूछता है. फिर उसका आईडी कार्ड निकलवाकर उसका नाम देखता है. विडियो इतने पर खत्म हो जाता है.

सब-इंस्पेक्टर गगनदीप सिंह और प्रभारी निरीक्षक विक्रम राठौड़, दोनों उत्तराखंड पुलिस में हैं. गगनदीप ने जो किया, उसकी तारीफ होनी चाहिए. जिस तरीके का तनाव विडियो में दिख रहा है, उससे लगता है कि भीड़ शायद उस मुस्लिम लड़के की लिंचिंग भी कर सकती थी.

पुलिस के पहुंचने से पहले लड़के की पिटाई हो चुकी थी
हमने रामनगर पुलिस को फोन किया. यहां के प्रभारी निरीक्षक हैं विक्रम राठौड़. उन्होंने इस घटना की पुष्टि की. वही बताया, जो हम आपको ऊपर बता चुके हैं. भीड़ में बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद् के भी लोग थे. घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस यहां पहुंची. पुलिस के आने से पहले भीड़ ने उस लड़के और उसके साथ आए उसके एक दोस्त की पिटाई की थी. पुलिस ने बताया कि आस-पास के इलाकों में रहने वाले लड़के-लड़कियां अक्सर मंदिर में एक-दूसरे से मिलने आते हैं. हिंदू भी. और मुस्लिम भी. भीड़ का ये भी कहना था कि लड़का-लड़की अश्लील हरकत कर रहे थे. हमने पुलिस से पूछा. कि वो अश्लील हरकत क्या थी? इसका जवाब नहीं मिला. अश्लीलता की कैटगरी बड़ी स्वैच्छिक चीज है. कोलकाता मेट्रो की घटना याद है? उसमें एक जोड़ा बस एक-दूसरे के करीब खड़ा था. शायद गले मिल रहा था. आसपास के लोगों को ये भी अश्लील लगा था. इतना अश्लील कि उन्होंने उस जोड़े को पीट दिया.

पुलिस की बातें सुनकर दिमाग भन्ना जाएगा
पुलिस ने बताया कि इस घटना में जो कपल था, उसमें लड़का और लड़की, दोनों बालिग थे. लड़की अपनी मर्जी से उस लड़के के साथ आई थी. विक्रम राठौड़ ने जो बाकी बातें कहीं, उसने हमें बहुत परेशान किया. उनकी भाषा मोरल पुलिसिंग वालों जैसी थी. उन्होंने हमें बताया कि पुलिस उस जोड़े को थाने लेकर गई. फिर लड़की के मां-बाप को वहां बुलाया गया. उनको पूरी बात बताई गई. मां-बाप को क्यों बुलाया गया, ये पूछने पर उन्होंने कहा-

लड़की बिना मां-बाप को बताए उस लड़के से मिलने आई थी. हम उसके घरवालों को बताना चाहते थे. कि देखो, तुम्हारी लड़की क्या कर रही है. सोचो. घर से स्कूल जाने के लिए निकली थी. लेकिन चुपके से वहां उस लड़के से मिलने आ गई. ये गलत काम तो है ही. हमने उन्हें बता दिया. अब उनकी जानकारी में आने के बाद भी अगर लड़की उस लड़के से मिलती है, तो वो जानें.

हमने उनसे पूछा. कि अगर लड़की या लड़के की ऑनर किलिंग हो जाती, तो? इसका उन्होंने ये जवाब दिया कि जो हुआ ही नहीं, उसके बारे में क्या सोचना. जब हमने ये कहा कि लड़की बालिग थी और अपनी मर्जी से आई थी, फिर घरवालों को बताने की क्या जरूरत थी. उन्होंने जवाब दिया-

देखिए. बालिग हो जाने के बाद भी कुछ लड़कियां समझदार नहीं हो पाती हैं. हम पुलिसवाले हैं. देखकर समझ जाते हैं. ऐसी लड़कियां ऐसा करती हैं. किसी अच्छे से लड़के को देखा और चक्कर में फंस गईं. फिर आज इसके साथ, कल उसके साथ. फिर ऐसे भी केस होते हैं कि बिना शादी के साथ रहने लग जाते हैं.

पुलिस के मुताबिक, घटना वाली जगह पर बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के लोग भी जमा हो गए थे. भगवा रंग के कपड़े पहने उस आदमी ने दो लड़कों का हाथ पकड़ा हुआ है. एक तो वो है, जो लड़की के साथ था. दूसरा उस लड़के का दोस्त है. जानकारी के मुताबिक, पुलिस के आने से पहले भीड़ ने इन दोनों को पीटा था.

हमने उन्हें याद दिलाया कि प्यार करना गैरकानूनी नहीं है. न ही लिव-इन में रहना ही कोई अपराध है. न ही किसी और जाति या धर्म के इंसान से प्यार करना क्राइम है. इस पर वो कहने लगे-

देखिए, आपकी बात सही है. मगर यहां हिंदू-मुस्लिम के प्यार करने पर हंगामा हो जाता है. पुलिस को सब देखना पड़ता है. आपकी बात सही है कि इसमें कुछ भी गैरकानूनी नहीं. लेकिन सामाजिकता भी एक चीज है. आप बताइए. अगर कोई हिंदू लड़का किसी मुस्लिम लड़की के साथ किसी मस्जिद में पकड़ा जाता, तो क्या होता? कितना हंगामा होता?

भीड़ का क्या कहें, जब पुलिस का ये हाल है
हमने उन्हें याद दिलाया कि पुलिस का काम क्राइम रोकना है. साथ ही, लोगों को प्रॉटेक्शन देना भी पुलिस का ही काम है. हमने उनसे कहा कि उनकी वफादारी भी कानून और अदालत के साथ है. इस पर भी वो सामाजिक मजबूरियां गिनाने लगे. विक्रम राठौड़ की बात सुनकर हमें ताज्जुब हुआ. लगा ही नहीं कि हमारी बात प्रभारी निरीक्षक से हो रही है. उनकी बातों में सांप्रदायिकता झांक रही थी. खाप जैसी मानसिकता उनकी चुगली कर रही थी. हमने उन्हें टोका. कि उनकी बातें मोरल पुलिसिंग जैसी हैं. जो कि पुलिस को कतई शोभा नहीं देती. इस पर उन्होंने हमसे पूछा- आप ही बताइए, हमें क्या करना चाहिए? मैंने कहा- आपको कानून के मुताबिक बरतना चाहिए. मोरल पुलिसिंग नहीं करनी चाहिए. इसके जवाब में उन्होंने बेहद कामचलाऊ तरीके से कहा- ठीक है, फिर नहीं करेंगे.

सिख समुदाय के लोग, खासतौर पर युवा इस विडियो को काफी शेयर कर रहे हैं. वजह ये कि गगनदीप सिंह सिख हैं.

तारीफ फर्ज निभाने वाले इंसान की
ये पुलिस में शामिल लोगों का हाल है. ये उनकी सेंसिटिविटी है. खाप जैसी भाषा. खाप जैसी सोच. इस सबके बीच बस गगनदीप सिंह की तारीफ है. इस विडियो को सिख समुदाय के लोग काफी शेयर कर रहे हैं. इस ऐंगल से कि गगनदीप सिंह सच्चे सरदार हैं. सच्चे सिख हैं. ये सच है कि गगनदीप सिंह सिख हैं. मगर उन्होंने जो किया, वो पुलिस की वर्दी पहनकर किया. अपनी ड्यूटी निभाई. भीड़ से भिड़ने पर खतरा तो उनको भी था. इसके बावजूद वो टिके रहे. तारीफ इस जज्बे की ही है. तारीफ इंसानियत की है.

Gangandeep Singh, a Sikh Sub-Inspector in Uttarakhand Police saved a Muslim from mob lynching in Ramnagar

https://www.thelallantop.com/jhamajham/gangandeep-singh-a-sikh-sub-inspector-in-uttarakhand-police-saved-a-muslim-from-mob-lynching-in-ramnagar/

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